नमस्कार, जयपुर में वेणुगोपालजी ने NSUI वाले विनोदजी की तारीफ की, लेकिन निगाह में ‘जन्मों के साथी’ रहे। बाड़मेर में हनुमानजी ने ‘सीडी’ का जिक्र कर दिया। नागौर में थाना इंचार्ज लेडी कॉन्स्टेबल पर भड़क गए और पंचायत चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री की बहू चर्चा में है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पायलट-गहलोत की ‘ट्यूनिंग’ कांग्रेस अध्यक्ष जी के बाप वाले बयान को पूर्व मुख्यमंत्रीजी ने पिताजी के पुराने बयान से क्रॉस कर दिया है। इस तरह राजनीति में भी गणित का नियम लागू होता है। कांग्रेस की आंदोलन सीरीज जारी है। देश बचाने का आह्वान करते हुए राष्ट्रीय महासचिव पीले चावल लेकर जयपुर पहुंचे। 1 नवंबर को दिल्ली में 1 लाख भी भीड़ लाने का टारगेट दिया। इस बीच महासचिव साहब ने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की खुलकर तारीफ की। विनोद को राजस्थान का विनोद कह दिया। उन्हें भरोसा है कि आंदोलन को जेनजी-अल्फा तक ले जाने का भार इन्हीं युवाओं के कंधों पर है। वेणुगोपालजी के स्वागत से लेकर विदाई तक के दृश्य में सबसे खास तस्वीर वह रही जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने एक दूसरे हाथ मिलाया। हंसी-मजाक किया। खुलकर हंसे। अंदरखाने कुछ भी चले, लेकिन आलाकमान के सामने दोनों दिग्गज नेता ‘जन्मों के साथी’ नजर आते हैं। 2. हनुमानजी ने किया CD का जिक्र पब्लिक बहुत भोली होती है। चुनाव में नेताजी की चोरी-डकैती, भ्रष्टाचार, छलावा, झूठ सब कुछ भूल जाती है। ऐसे में नेताजी के विरोधी नेताजी को मेहनत करनी पड़ती है। पब्लिक को बताना पड़ता है कि फलां नेताजी ने फलां-फलां वर्ष में आपके साथ क्या किया था। बाड़मेर के एक नेताजी एक बार उस मामले में ‘फंस’ गए थे, जिसमें शास्त्रों के अनुसार देवता भी फंस चुके हैं। नेताजी की CD मार्केट में आ गई। नेताजी को पार्टी से बाहर कर दिया गया। नेताजी वापसी को छटपटाते रहे। उन्हीं की पार्टी के लोग दुश्मन बन गए। पार्टी ने भूल-चूक माफ करते हुए नेताजी को दोबारा पार्टी में ले लिया। लेकिन अपने ही लोगों को यह मंजूर नहीं। उन्हीं की पार्टी के सांसद ने पिछले साल कहा था- चरित्रहीन की कहीं भी जगह नहीं है। परिवार में भी जगह नहीं होती। पार्टी में भी नहीं होती। शहरभर में रातों-रात नेताजी की सीडी वाले पोस्टर लगाए गए। इतना सब कुछ झेलने के बाद भी नेताजी ने हार नहीं मानी और ‘कर हर मैदान फतेह’ का घोष करते हुए खुद को मोटिवेट करते रहे। जख्म भरने लगे थे। लेकिन फिर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल बाड़मेर पहुंच गए। वहां उन्होंने रस ले-लेकर नेताजी का मखौल उड़ाया। बोले- नेताजी की एक सीडी आई थी, वो AI से बनी थी वास्तविक थी? उनके लोग कह रहे थे कि पार्टी में नहीं लेंगे, फिर ले लिया। ये ऐसा दाग है जिसे धोने का हर पैंतरा नेताजी ने आजमा लिया। पब्लिक चोरी-डकैती, भ्रष्टाचार, छलावा, झूठ सब कुछ भूल जाती है, लेकिन जिस चक्कर से देवता भी नहीं बच सके, उसका क्या करें? 3. ‘कैमरा फ्रेंडली’ थाना इंचार्ज साहब कैमरा फ्रेंडली होना कोई बड़ी बात नहीं है। जमाना ही रील का है। एल्गोरिदम में आया एक वीडियो आदमी को कहीं से कहीं पहुंचा देता है। रातों-रात चर्चा में ला देता है। स्टार बना देता है। बड़े-बडे़ नेताओं को यह रोग होता है। एक वक्त था जब राजनीति जन सेवा के लिए की जाती है। अब कई नेता ऐसे भी हैं जो रील के लिए जन सेवा करते हैं। एक पार्टी की मैडम ने कैमरे के सामने मरीजों को बिस्किट-केला देकर रील बनाई। मरीज ज्यादा थे और बिस्किट-केला सीमित। ऐसे में कैमरे के सामने देखते हुए फोटो खिंचाने और फिर वापस ले लेने का जतन किया गया। दुर्भाग्य से कैमरे में वापस लेने वाली चीजें भी रिकॉर्ड हो गईं। कुल मिलाकर जो कैमरा आपको स्टार बना सकता है, वही गर्त में भी धकेल सकता है। नागौर के खींवसर थाना के इंचार्ज सुरेश चौधरी हैं। चौधरीजी कैमरा फ्रेंडली व्यक्ति हैं। तेजाजी के मेले में गाड़ी के बोनट पर चढ़कर स्टंट करने वाले युवाओं को ललकारने वाला उनका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी देखा गया। इंचार्ज साहब सुर्खियों में आ गए। उनकी कई रीलें वायरल हो गईं। साहब को सुनहरे सपने आने लगे। चर्चा है कि साहब ने एक बंदा परमानेंट रख लिया। वह साथ-साथ घूमता है। साहब लट्ठ बजाएं या मजाक करें, तुरंत मौके पर ही रिकॉर्ड कर लेता है। इस काम में भी कोई बुरी बात नहीं। आप अपना काम करो, कैमरा अपना काम करेगा। लेकिन कभी-कभी होता ये कि कैमरा अपना काम किस भांति करे, इस प्रयास में व्यक्ति काम करने लगता है। पंचायत चुनाव में खुद को चुस्त-दुरुस्त दिखाने के लिए साहब हाथ में लट्ठ लेकर बूथ की रखवाली करते नजर आए। हमेशा की तरह कैमरा उनके इर्द-गिर्द था और उनकी मुस्तैदी को कैद कर रहा था। ड्यूटी पर तैनात महिला कॉन्स्टेबल को देख साहब उसकी तरफ बढ़े और बोले- भीड़ यहां तक क्यों पहुंच रही है? महिला जवान ने जवाब दिया, जिसे साहब ने बहाना कहकर खारिज कर दिया। सख्त हिदायत की भाषा में बोले- नौकरी तो करनी ही पड़ेगी, नहीं करनी है तो छोड़ दो। महिला जवान ने फिर जवाब दिया। इंचार्ज बोले- बताना रहने ही दो, यहां काम करना ही पड़ेगा। सब कर रहे हैं। 4. चलते-चलते.. केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री रहे महादेव सिंह खंडेला 5 बार विधानसभा चुनाव और एक बार लोकसभा चुनाव जीते। उन्होंने अपने गांव दूल्हेपुरा के सरपंच के तौर पर राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। अब महादेव सिंह खंडेला की बहू मीनाक्षी चुनावी मैदान में हैं। पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के लिए गांव की गली-गली घूम रही हैं। राजनीति में जनता ही जनार्दन है। विरासत में अगर सियासत मिले तो लॉन्च पैड अच्छा मिल जाता है। लेकिन सिक्का खरा हो तभी मार्केट में चलता है। खोटे सिक्के का भार जनता जेब पर नहीं डालती। यहां अपनी पहचान खुद बनानी पड़ती है। चाहे विरासत कितनी ही बड़ी रही हो। जनता की परीक्षा से गुजरने का एक ही तरीका है- चुनाव। इनपुट सहयोग- सचिन शर्मा (जयपुर), विश्नाराम सैनी (रियांबड़ी, नागौर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी। … यह खबर भी पढ़ें… मिठाई पर चांदी नहीं ‘जहर’:लैब टेस्ट में 99% वर्क नकली, चांदी में एल्युमिनियम और सोने में तांबा-जिंक; लिवर-किडनी खराब होने का खतरा राजस्थान में काजू कतली, बर्फी जैसी मिठाइयों पर लगने वाले चांदी और सोने के वर्क एल्युमिनियम और तांबे से तैयार हो रहे हैं। वहीं एल्युमिनियम जिसे खाने से लिवर-किडनी खराब हो सकती है। कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है। दैनिक भास्कर ने ये सच सामने लाने के लिए 15 दिन पड़ताल की। (पूरी खबर पढ़ें) दैनिक भास्कर को Google प
