नमस्कार, जयपुर में जीरो FIR दर्ज कराने के चक्कर में ‘हाथ’ वाले चीफ साहब पैर में मोच लगवा बैठे। जोधपुर में पूर्व सीएम साहब ने दिखा दिया कि बाल भले सफेद हो गए, लेकिन हेयर स्टाइल की परवाह आज भी है। झुंझुनूं में विधायकजी ने सगाई कराने का वादा कर दिया तो डूंगरपुर में फ्रैक्चर वाले टीचर की चुनावी ड्यूटी लगा दी गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. चीफ साहब के पैर में मोच जीरो FIR दर्ज कराने का आदेश उन्हीं राहुल जी ने दिया था जिन्होंने एक बार कहा था- डोटासरा जी आप राजस्थान में बढ़िया काम कर रहे हो। आदेश का पालन कराने में डोटासरा जी ने जी-जान झोंक दी। पुलिस कमिश्नरेट में डेरा डाल दिया। BNS की धाराएं रट लीं। यूथ विंग, महिला विंग, सीनियर, जूनियर सबको लगा दिया। यहां तक कि कमिश्नरेट में ‘सबको सन्मति’ वाली प्रार्थना कर दी। शंख तक बजवाया। कुल मिलाकर सबकी ‘रगड़ाई’ करा दी। इसी रगड़ाई के दौरान 9 नंबर कमरे की सीढ़ियां चढ़ते-उतरते पैर में चोट लगवा बैठे। बड़े आंदोलनों में प्रमुख नेता को चोट लगना दो तरह से फायदेमंद है। नीचे वाले कार्यकर्ताओं को लगता है कि जब बड़े वालों की रगड़ाई हो रही है तो हमें भी मैदान में डटे रहना है। ऊपर वाले पदाधिकारियों को लगता है कि काम बना-न बना, नेताजी ने भाग-दौड़ कमी नहीं रखी। सोने पर सुहागा तब हुआ, जब डोटासरा जी व्हीलचेयर पर विराजे। सुहागे में सुगंध ये कि व्हीलचेयर को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने ठेला। सच्चे अर्थों में इसी को ‘सबका साथ-सबका विकास’ कह सकते हैं। जहां तक जीरो FIR की बात है तो उसका परिणाम जीरो ही रहा। ‘डांडिया’ से फ्री होकर कमिश्नर साहब कमिश्नरेट पहुंचे और दो टूक शब्दों में कहा- विधि के मुताबिक FIR दर्ज नहीं होगी। इसके बाद कमिश्नरेट में तीन दिवसीय ‘पर्यटन’ कार्यक्रम का पटाक्षेप हुआ। बहरहाल, कांग्रेसियों ने हार नहीं मानी है। डोटासरा जी ने आगामी कार्यक्रम घोषित कर दिया है- अब कोर्ट जाएंगे। 2. पूर्व सीएम की हेयर स्टाइल युवा अशोक गहलोत जब मुख्यमंत्री के तौर पर राजस्थान का नेतृत्व करते थे तो कार्टूनिस्टों के चहेते कैरेक्टर थे। लम्बी नाक और तीन तरफ चोंच की तरह निकले बाल बनाते ही कार्टून तैयार हो जाता था। इस तरह हेयर स्टाइल अशोक गहलोत की पहचान बन गई। आज भले पूर्व सीएम के बाल सफेद हो गए। बालों का घनत्व कम हो गया, लेकिन हेयर स्टाइल बरकरार है। इसी के लिए गहलोत जेब में कंघा रखते हैं। जोधपुर में शेरगढ़ इलाके के चामू गांव में एक जनसभा हुई। जनसभा में गहलोत भी पहुंचे थे। एंट्री धमाकेदार रही। मंच पर बैठे पूर्व सीएम ने जेब से कंघा निकाला और बाल संवारने लगे। सभा को कांग्रेस नेता करण सिंह उचियारड़ा संबोधित कर रहे थे। बात देश से शुरू हुई। स्टेट पर आई। और पंचायत चुनाव के वोट पर आकर ठहरी। इस सफर में उचियारड़ा ने पूर्व सीएम के कामों को जबरदस्त ढंग से रखा। माहौल बन गया। गहलोतजी के नारे लगने लगे। उचियारड़ा बोले- एक वोट की बड़ी ताकत है। एक वोट गलत पड़ा तो 25 लाख के 5 लाख हो गए, अंग्रेजी स्कूल बंद हो गए, बिजली-सिलेंडर.. गहलोत को लेकर ‘चौथी बार’ वाले नारे लगे। इस पर पार्टी के अंदर ही बवाल हो गया था। कई मौकों पर गहलोत ने समर्थकों को रोक कर सुर्खियां बटोरीं। जैसलमेर में फिर नारा गूंजा। हालत ये है कि अब ‘चौथी बार’ के आगे कुछ कहने की दरकार नहीं। रही सही कसर कमिश्नरेट में रगड़ाई का जिक्र करके कर दिया। कुल मिलाकर गहलोत बोलें या चुप रहें, इशारा करें या मुस्कुराएं…उनका हर स्टाइल सियासी और बालों की तरह पका हुआ है। 3. पंचायत चुनाव के वादे और ड्यूटी 1987 में एक गुमनाम सी फिल्म आई- दिल तुझको दिया। फिल्म में संगीतकार राजेश रोशन ने एक गीत लिखा और कंपोज किया- वादा न तोड़। जनता भी नेता से यही उम्मीद करती है कि वह जो वादा चुनाव से पहले करे, उसे चुनाव के बाद जरूर पूरा करे। कभी-कभार नेतागण वोट पाने के लिए हवा-हवाई वादे कर जाते हैं। बाद में जनता कोरस में गाती है- तू मुंह न मोड़, वादा न तोड़। अगर सवाल किया जाए कि शेखावाटी क्षेत्र में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है तो 10 में 9 लोग कहेंगे- पानी। लेकिन जिस तरह से सरपंच प्रत्याशी शादी-ब्याह कराने का वादा कर मैदान में उतर रहे हैं, उससे लगता है कि इलाके में कुंवारों की तादाद बड़ा चुनावी मुद्दा है। इस मुद्दे के प्रभाव से सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार भी वाकिफ हैं। वे काफी सीनियर नेता हैं। पंचायत चुनाव को लेकर वे काकोड़ा गांव में सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने वादा किया- काकोड़ा पंचायत के लोग जो भी कहेंगे वो काम करा दूंगा। आप कहो कि लड़के की सगाई करानी है तो वो भी करा दूंगा। गांव वाले समझ गए कि वादा चुनावी है, ठहाका मारकर हंसने लगे। चुनावी वादा करना जितना आसान है, उतना ही कठिन है चुनाव में ड्यूटी देना। डूंगरपुर में अनोखा मामला सामने आया। ऐसे टीचर की चुनाव में ड्यूटी लगा दी, जिसका हाल ही एक्सीडेंट हुआ था। ड्यूटी लगाने वाले को बहानेबाजी लग रही थी। टीचर टूटे हाथ से ही ड्यूटी देने पहुंच गया। फ्रैक्चर रिपोर्ट और प्लास्टर देख अक्ल आई। टीचर को ड्यूटी से मुक्त कर घर भेज दिया गया। इस तरह एक टीचर को ट्रेनिंग के दौरान ही मिर्गी का अटैक आ गया। मौके पर डॉक्टरी सुविधा नहीं मिली। 20 मिनट बाद तहसीलदार की गाड़ी से हॉस्पिटल पहुंचाना पड़ा। ड्यूटी निरस्त की गई। 4. चलते-चलते.. दिल्ली में लेडी कॉन्स्टेबल और NSUI की राष्ट्रीय सचिव बस में गुत्थमगुत्था हो गईं। पुलिस का काम है प्रदर्शनकारियों को दायरे में रखना। बल प्रयोग करना। बस में जो कुछ हुआ, उस घटना में राजनीति की गुंजाइश थी। राजनीति हुई भी। राजनेता भूल गए कि पुलिसकर्मी भी एक महिला है। उसे भी अपना पक्ष रखने का हक है। कभी-कभी पुलिस चारा बन जाती है। नेतागण उन्हें भला-बुरा कहकर अपना कद बढ़ा लेते हैं। वही पुलिस उनकी सुरक्षा में तैनात होती है। 24 घंटे ड्यूटी बजाती है। पुलिस खामोश रहे तो सवाल, एक्शन ले तो सवाल। जयपुर कमिश्नरेट में 3 दिन तक धरना प्रदर्शन चला। कई पुलिसवालों ने घंटों तक लगातार ड्यूटी दी। एक पुलिसवाले का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर है। पुलिसकर्मी बरामदे में बैठे-बैठे सो गया। नेतागण के लिए रजाई-गद्दों का इंतजाम था। थके हुए पुलिसकर्मी क्या करें? राजधानी के हरमाड़ा इलाके में दशहरे पर सांस्कृतिक प्रोग्राम हुआ। कार्यक्रम में हरमाड़ा थाना SHO नरेंद्र भड़ाना भी पहुंचे थे। तेजाजी के गीत पर इंचार्ज साहब ने जोरदार डांस किया। हर कोई मुरीद हो गया। लोग साथ थिरकने लगे। इनपुट सहयोग- महेंद्र सैनी , रिषभ सैनी (जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
