September 10, 2026

राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच नई सियासी तस्वीर उभरी है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने जयपुर में मंच साझा कर बीजेपी और कांग्रेस के सामने तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं ने साफ संकेत दिए कि यह गठबंधन केवल निकाय चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। निकाय चुनाव से शुरू हुआ यह राजनीतिक साथ आगे विधानसभा चुनाव तक जारी रह सकता है। ओवैसी ने इसे राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प की शुरुआत बताया। वहीं हनुमान बेनीवाल ने कहा- जयपुर की धरती से नई राजनीति का आगाज हो रहा है। दोनों नेताओं ने रविवार रात जयपुर के वार्ड 146 में AIMIM से प्रत्याशी फिरोज बानो के समर्थन में मंच साझा किया। ओवैसी बोले- बीजेपी-कांग्रेस के बीच फंसी रही राजस्थान की राजनीति ओवैसी ने कहा- लंबे समय से राजस्थान की राजनीति भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब जनता के सामने तीसरा विकल्प देने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने निकाय चुनाव को मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जहां RLP के प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, वहां जनता उन्हें समर्थन दे। ओवैसी ने भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम के नाम पर तनाव और राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रदेश में शिक्षा, सरकारी स्कूलों की स्थिति, मूलभूत सुविधाओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा। बेनीवाल बोले- राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत हनुमान बेनीवाल ने ओवैसी के साथ राजनीतिक गठजोड़ को राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा- जाट और मुस्लिम समुदाय पहले भी राजनीतिक रूप से साथ रहे हैं और आगे भी यह साथ बना रहेगा। बेनीवाल ने सरकार को पेपर लीक, किसानों की समस्याओं, अग्निवीर योजना और युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा- गठबंधन केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि इन मुद्दों को लेकर संघर्ष करने के लिए भी आगे आएगा। निकाय चुनाव से विधानसभा तक साथ चलने का दावा जयपुर के भट्टा बस्ती के वार्ड 146 में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना सिर्फ चुनावी सभा तक सीमित नहीं माना जा रहा। ओवैसी और बेनीवाल के बयानों से साफ है कि दोनों दल निकाय चुनाव के बाद भी राजनीतिक गठजोड़ को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। राजस्थान की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच दो ध्रुवों में बंटी रही है। ऐसे में AIMIM और RLP का यह गठबंधन तीसरे विकल्प के तौर पर खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओवैसी का मुस्लिम वोट बैंक और बेनीवाल का जाट व किसान राजनीति पर प्रभाव क्या राजस्थान में कोई नया राजनीतिक समीकरण बना पाएगा। ऐसे में निकाय चुनाव इस गठबंधन की पहली परीक्षा होगा। इसके बाद यह तय होगा कि जयपुर से शुरू हुई ओवैसी-बेनीवाल की यह नई सियासी दोस्ती विधानसभा चुनाव तक कितनी मजबूत रहती है और भाजपा-कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति को कितनी चुनौती दे पाती है। … ये खबर भी पढ़ें… जोधपुर में शेखावत-गहलोत फैक्टर से कांटे की टक्कर:उदयपुर में कांग्रेस को बागियों से खतरा; पाली में राठौड़ के गढ़ में निर्दलीयों से बदले समीकरण

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