September 11, 2026

इंजीनियर कपल ने कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी की बजाय एग्रीकल्चर में स्कोप को समझा। डेयरी फार्म को स्टार्टअप की तरह शुरू किया। 20 गिर गायों के पालन का काम समझने में चार साल लगे। लोकल मार्केट बनाने के लिए घर-घर फ्री दूध बांटा। एग्जीबिशन और इंटरनेट से मिल्क प्रोडक्ट्स लोगों तक पहुंचाए। 8 साल में मिल्क प्रोडक्ट की डिमांड देश के साथ विदेश में हो रही है। सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए पहुंच गया है। उनका कहना है- ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। क्योंकि बढ़ते केमिकल के उपयोग से जमीन खराब हो रही है। लोगों और पशुओं को शुद्ध भोजन नहीं मिल रहा है। बीमारियां बढ़ रही हैं। म्हारे देश की खेती में आज जयपुर के युवा कपल प्रतिशील किसान की… इंजीनियर कपल साथ में चला रहा डेयरी फार्म जयपुर के नारायण सर्किल निवासी विभोर जैन (31) शहर से करीब 47 किलोमीटर दूर हिंगोनिया के तिबारिया गांव में ऑर्गेनिक स्टार्टअप की तरह डेयरी फार्म चला रहे हैं। जनवरी 2022 में इशिता जैन (29) से शादी हुई। दोनों शहर की लाइफस्टाइल की बजाय खेत और गायों के बीच रहते हैं। विभोर के पिता राजीव जैन (65) टेक्सटाइल इंडस्ट्री में नौकरी करते थे। नौकरी में ट्रांसफर के कारण विभोर की पढ़ाई अलग-अलग शहरों में हुई। स्कूली एजुकेशन इंदौर (मध्य प्रदेश) और इंडोनेशिया में की। 2017 में बेंगलुरु से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। इशिता ने नागपुर से आईटी में इंजीनियरिंग और पुणे से MBA किया। घर में दो गायों से शुरू हुआ पशुपालन से जुड़ाव विभोर बताते हैं- घर में दो गाय थीं। यहीं से गायों से लगाव बढ़ा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान समझ आया कि एग्रीकल्चर में बड़ा स्कोप है। अध्यात्म से जुड़ाव ने भी जीवन को नई दिशा दी। इसके बाद कॉरपोरेट नौकरी की बजाय एग्रीकल्चर को करियर बनाने का फैसला किया। इंजीनियरिंग के बाद डेयरी और पशुपालन की स्टडी 2017 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद करीब 1 साल तक डेयरी और पशुपालन की स्टडी की। गुजरात जाकर पशुपालकों से मिले। गायों के पालन, चारे और दूध उत्पादन के बारे में सीखा। साल 2018 में जयपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर भांकरोटा में सात बीघा जमीन किराए पर ली और डेयरी फार्म शुरू किया। राजकोट से 20 गाय और एक सांड लाए। शुरुआत बड़े निवेश के बजाय एक्सपेरिमेंट के तौर पर की, ताकि काम को समझकर आगे बढ़ाया जा सके। ग्राहक नहीं थे, दूध फ्री बांटकर बाजार बनाया विभोर बताते हैं- शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती दूध का बाजार तैयार करना था। दूध का भाव 91 रुपए लीटर रखा। ग्राहकों को जोड़ने के लिए कई लोगों को दूध फ्री दिया, ताकि वे क्वालिटी समझ सकें। पैम्फलेट बांटे और एग्जीबिशन में स्टॉल लगाकर लोगों को अपने काम के बारे में बताया। एक साल की मेहनत से लोगों का भरोसा बढ़ने से लोकल मार्केट तैयार हुआ। विभोर बताते हैं- करीब तीन-चार साल के अनुभव से समझ आया कि सिर्फ दूध और घी बेचकर अच्छी इनकम करना मुश्किल है। नौकरी की बजाय डेयरी को स्टार्टअप के तौर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया। 2021 में जयपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर हिंगोनिया के तिबारिया गांव में साढ़े छह बीघा जमीन खरीदी और नया सेटअप शुरू किया। उस समय फार्म में करीब 80 गाय थीं, जिनमें 35 दूध देने वाली थीं। रोज करीब 150 लीटर दूध होता था। पत्नी भी साथ आईं, अब 100 गायों से रोज 300 लीटर दूध विभोर की पत्नी इशिता बताती हैं- 2022 में शादी के बाद जब पता चला कि खेत में गायों के बीच ही रहना है तो मुझे अजीब नहीं लगा। मुझे शुरू से प्रकृति के पास रहना पसंद था। मैं भी कारोबार से पूरी तरह साथ जुड़ गईं। फार्म पर करीब 15 लोग काम करते हैं, लेकिन बिजनेस की ग्रोथ के लिए खुद का इन्वॉल्वमेंट जरूरी है। इसलिए दोनों फार्म पर ही रहते हैं और काम संभालते हैं। अब फार्म में करीब 100 गाय हैं, जिनमें 60 दूध देती हैं। इनसे रोज करीब 300 लीटर दूध निकलता है। करीब 100 लीटर दूध सीधे ग्राहकों को 150 रुपए लीटर के भाव से सप्लाई करते हैं। बाकी दूध से अलग-अलग वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। दूध से घी, छाछ और मिल्क पाउडर; विदेशों तक पहुंच रहा प्रोडक्ट इशिता बताती हैं- करीब 28 से 30 लीटर दूध से एक लीटर घी तैयार होता है। घी बिलौना से बनाया जाता है और चूल्हे पर तैयार होता है। रोज करीब 8 लीटर घी बनता है। घी की विदेशों तक डिमांड है। करीब 200 लीटर छाछ रोज निकलती है, जिसे होटल-ढाबों के साथ रेगुलर कस्टमर को दूध के साथ सप्लाई की जाती है। कारोबार बढ़ाने के लिए करीब 30 लाख रुपए की फ्रीज ड्रायर मशीन लगाई। इसमें दूध सुखाने के दौरान हीट का इस्तेमाल नहीं होता। एक बैच में 24 लीटर दूध से करीब 4 किलो पाउडर बनता है और प्रक्रिया में 24 घंटे लगते हैं। 500 ग्राम पैकेट 2,090 रुपए में बिकता है। ट्रैवल करने वाले और विदेशों में रहने वाले लोगों में इसकी मांग है। फ्रीज ड्रायर मशीन से कोलोस्ट्रम पाउडर भी बनाते हैं। गाय के बच्चे के जन्म के शुरुआती 12 घंटे के दूध से तैयार होने वाले इस पाउडर की 100 ग्राम की कीमत 1,880 रुपए है। एथलीट्स में भी इसकी मांग है। पकी सब्जियों को भी फ्रीज ड्रायर से डिहाइड्रेट करते हैं, जो करीब एक साल तक स्टेबल रहती हैं। इसे नमी से दूर रखना होता है। प्रयासों से बढ़ाई दूध की क्वालिटी, अब एग्रो टूरिज्म की तैयारी विभोर के मुताबिक अच्छी क्वालिटी का दूध लेने में सबसे बड़ी चुनौती गायों का चारा है। कई बार इंसानों के खाने से ज्यादा मिलावट जानवरों के खाने में होती है। इसलिए पौष्टिक आहार के लिए 6 लाख रुपए खर्च कर तमिलनाडु से दो मशीनें मंगाकर तेल प्रोसेसिंग यूनिट लगाई। लकड़ी की घाणी से मूंगफली, सरसों, नारियल, बादाम और तिल का तेल निकाला जाता है। एक बैच में करीब 20 किलो मटेरियल का तेल निकालने में दो घंटे लगते हैं। इससे शुद्ध तेल के साथ गायों के लिए खल भी मिलती है। अब उनके पास कुल 18 बीघा जमीन है। दो बीघा गायों के लिए रिजर्व है और 10 बीघा में नेपियर, सुपर नेपियर, मोरिंगा, रजिगा, बाजरा और जई का हरा चारा उगाते हैं। सूखे चारे में ज्वार की कुट्टी दी जाती है। छह बीघा में एग्रो फॉरेस्ट्री है, जहां करीब 2,000 पेड़ लगाए हैं। इनमें 300 चंदन और 600 आम के पेड़ हैं। गिर नस्ल की गायें 15-16 लीटर रोज दूध देती हैं। नस्ल सुधार के लिए ब्रीडिंग भी करते हैं और अच्छी नस्ल की गायें करीब 2.50 लाख रुपए तक में बेचते हैं। अब यह इंजीनियर कपल फार्म को एग्रो टूरिज्म मॉडल के रूप में भी विकसित कर रहा है। … खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 250-पॉलीहाउस से आया खेती का आइडिया, अब ‘ग्रीन गोल्ड’ उगाया:14 साल पुरानी जॉब छोड़ी, पुराने सेटअप से शुरुआत; खीरे-महोगनी से लाखों का प्रॉफिट 14 साल तक मार्केटिंग कंपनी में जॉब की। फिर प्राइवेट जॉब छोड़कर खीरे और महोगनी (ग्रीन गोल्ड) की खेती शुरू की। तीन साल में ही उसकी सालाना कमाई 10 लाख तक पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़िए

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