भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अफसरों ने सूचना का अधिकार (RTI) में ही झूठे दावे कर डाले। NHAI के जयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय (रीजनल ऑफिस) से दिव्यांगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर RTI में जवाब मांगा गया था। विभाग ने दावा किया था यहां- दिव्यांगों के लिए रैंप, सुलभ प्रवेश द्वार, आरक्षित पार्किंग, टॉयलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन भास्कर टीम ने जब मौके पर जाकर पड़ताल की तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी। दिव्यांगों के लिए रिजर्व पार्किंग, विशेष टॉयलेट तो दूर, जिस बेसमेंट में दिव्यांगों के फास्टैग से जुड़ी सुविधा दी जा रही है, वहां पहुंचने के लिए भी न लिफ्ट है, न रैंप। पढ़िए ये पूरी स्टोरी…. क्या है मामला? दरअसल, राजस्थान में रहने वाले दिव्यांगों को फ्री फास्टैग सुविधा दी जाती है। इसके लिए प्रदेशभर के दिव्यांगों को NHAI के रीजनल ऑफिस जयपुर आना पड़ता है। दिव्यांगों ने भास्कर टीम को बताया था कि रीजनल ऑफिस में उनके लिए कोई सुविधाएं नहीं हैं, बेसमेंट में बने फास्टैग काउंटर तक जाने के लिए भी उन्हें एक हेल्पर साथ ले जाना पड़ता है। इस संबंध में आरटीआई लगाकर NHAI के रीजनल ऑफिस जयपुर में दिव्यांगों से जुड़ी सुविधा के बारे में जानकारी मांगी गई थी। विभाग के अधिकारियों ने जो जवाब दिए… RTI के जवाब में 5 दावे और उसकी पड़ताल आरटीआई में भेजे गए जवाब में एनएचएआई ने दावा किया कि श्याम नगर (F-120) स्थित दफ्तर में ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ (RPwD Act) के तहत पूरी सुविधाएं हैं। विभाग ने लिखित में 5 बड़े दावे किए- रैंप, सुलभ प्रवेश द्वार, रिजर्व पार्किंग, टॉयलेट और पूर्ण व्हीलचेयर की सुविधा है। भास्कर टीम ने NHAI के रीजनल ऑफिस जयपुर में जाकर दावों की पड़ताल की। दावा-1 : दिव्यांगों के लिए ‘रैंप और सुगम एंट्री उपलब्ध है हकीकत : NHAI का ऑफिस एक मकान में चल रहा है। मैन गेट से एंट्री के बाद ऑफिस में जाने के लिए दो दरवाजे हैं। दोनों ही दरवाजों में दिव्यांगों के लिए कोई मानक (Standard Size) रैंप नहीं है। जो सीढ़ियां बनी हैं, वे इतनी ऊंची है कि बिना किसी बाहरी मदद के दिव्यांग का व्हीलचेयर से अंदर जाना पूरी तरह असंभव है। दावा-2 : रिजर्व पार्किंग उपलब्ध है हकीकत : कार्यालय में पार्किंग जैसी कोई सुविधा नजर नहीं आई, न कहीं बोर्ड लगा हुआ था और न ही दिव्यांगों के लिए कोई रिजर्व पार्किंग थी। जिस घर में ऑफिस चल रहा है, वहां अंदर एक या दो कार या कुछ बाइक (7-10 बाइक) ही खड़ी करने की ही जगह है। ऑफिस में काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की कारें भी कार्यालय के बाहर सड़क किनारे खड़ी मिलीं। दावा-3 : टॉयलेट की सच्चाई चौंकाने वाली हकीकत : जब रिपोर्टर ने टॉयलेट का मुआयना किया, तो वहां सामान्य टॉयलेट मिले। दिव्यांगों के अनुकूल (कमोड के पास सपोर्टिव ग्रैब बार्स, लो-हाइट वॉशबेसिन, एंटी-स्किड फ्लोरिंग) जैसी किसी सुविधा का नामोनिशान नहीं था। दावा-4 : व्हीलचेयर उपलब्ध है हकीकत : दफ्तर का गलियारा और एंट्री पॉइंट इस तरह से ब्लॉक है कि वहां व्हीलचेयर का घूम पाना ही मुश्किल है। दावा-5 : दिव्यांगों के लिए रैंप और आसान सुविधाएं हकीकत : रिपोर्टर ने जब कार्यालय में दिव्यांगों के लिए फास्टैग के बारे में पूछा तो कर्मचारियों ने बताया कि इसके लिए बिल्डिंग के बेसमेंट में जाना पड़ेगा। सबसे हैरानी की बात यह थी कि बेसमेंट में जाने के लिए न कोई लिफ्ट थी और न ही कोई रैंप। सीढ़िया इतनी खड़ी है कि किसी दिव्यांग के लिए बेसमेंट में प्रवेश कर पाना बहुत ही चुनौती भरा है। RTI में झूठी सूचना देने पर सख्त कार्रवाई एक्सपर्ट वैभव भंडारी के अनुसार आरटीआई के तहत जानबूझकर झूठी, गलत या अधूरी जानकारी देने पर दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 (1) के अनुसार, यदि कोई लोक सूचना अधिकारी (PIO) गलत सूचना देता है, तो सूचना आयोग उस पर 250 रुपए रोजाना के हिसाब से अधिकतम 25,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। इसके साथ ही, आयोग संबंधित विभाग के उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश भी कर सकता है। पीड़ित आवेदक ऐसी स्थिति में धारा 18 के तहत सीधे सूचना आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है।
