October 21, 2026

नमस्कार, जयपुर कमिश्नरेट में दिग्गज सोये रह गए और उधर गहलोत जी ने युवाओं को ‘रगड़ाई’ वाली टिप दे दी। वहीं ग्रेड फोर्थ नौकरी लेकर रसोइया बने कर्मचारियों के आंसू नहीं थम रहे, उन्हें किरोड़ी बाबा की याद सता रही है और कोटा में बस हादसे के बाद हनुमानगढ़ के ट्रैफिक इंचार्ज ने ड्राइवरों को काम की नसीहत दे दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. प्रदर्शन के बीच ‘रगड़ाई’ की टिप आलाकमान की ओर से चीफ साहब को फरमान मिला था कि राजस्थान में FIR दर्ज कराओ। वह साधारण आदेश नहीं था। इसलिए तुरंत अमल में नहीं लाया गया। कोई नौसिखिया नेता होता तो फोन आते ही नजदीकी थाने पहुंच जाता और इत्मीनान से कहता- थानेदार साहब जल्दी रपट लिखिए। लेकिन फोन चीफ साहब को आया था। चीफ साहब उन लीडर्स की श्रेणी के नेता बन चुके हैं जिनके डुप्लीकेट भी मार्केट में घूमते हैं। तो चीफ साहब ने प्लान बनाया कि FIR बहाना है, सभी को कमिश्नरेट में वक्त बिताना है। लिहाजा बड़े-बड़े नेता FIR दर्ज करने की मांग करते हुए कमिश्नरेट पहुंच गए। उस वक्त कमिश्नर साहब पता नहीं कहां थे? उन्हें पहले गायब घोषित किया गया। फिर डांडिया खेलने के आरोप लगाए गए। दिल्ली में पुलिसवाली से पिटकर या पीटकर सुर्खियों में आई रितु बराला भी थीं। विनोद जाखड़ भी थे। तमाम बड़े नेता कमिश्नरेट के गलियारे में जाकर बैठ गए। वार्ताएं फेल होनी ही थी। रातभर वहीं डेरा डाले रखा। रजाई-गद्दा, कॉफी-चाय सबका इंतजाम किया गया। तीसरे पहर ठंड बढ़ी तो चादरें खींचकर दिग्गज सो गए। इस बीच मौका पाकर पूर्व मुख्यमंत्रीजी ने रितु बराला और कांग्रेस नेता सीबी यादव से संवाद शुरू किया। युवाओं को देख उन्हें ‘रगड़ाई’ शब्द क्लिक हुआ। वे बताने लगे- मैं कई साल से कह रहा हूं बिना रगड़ाई के पद मिल जाए तो ढंग से काम नहीं कर सकते। मेरी खुद की रगड़ाई हो चुकी है। बात में दम तो है। लेकिन चर्चा है कि रगड़ाई के बहाने कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना तो नहीं? क्योंकि इसी रगड़ाई का जिक्र उन्होंने जुलाई 2019 में खास नेता के लिए किया था। 2. याद आए बाबा किरोड़ी लाल एक कहावत है- जिसका काम उसी को साजे, और करे तो डंडा बाजे। कहावत में सहूलियत के कारण कोई डंडा लिख देता है, कोई जूता और कोई मूर्ख। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग में ग्रेड फोर्थ के लिए युवाओं ने फॉर्म भरा था। उस वक्त सोचा होगा कि किसी अफसर के कमरे के बाहर आराम से कुर्सी पर बैठेंगे। घंटी बजेगी, तभी उठेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ चयनितों के आगे रसोइया और चौकीदार लिख दिया गया। अब नौकरी का सवाल है। छोड़ो तो दिक्कत, करो तो डबल दिक्कत। तो नव-चयनितों ने कुछ दिन नौकरी की और जिस प्रकार चावल सीजे या नहीं, इसका पता एक चावल से लग जाता है, उसी प्रकार नौकरी करने योग्य है या नहीं, इसका पता चंद दिनों में लग गया। पुरुष कर्मचारी को फिर भी पैंट के ऊपर निक्कर पहनकर सुपरमैन बन गए। लेकिन महिला कर्मचारियों की शामत आ गई। एक ने अपना दर्द सुनाया- पहले तो कहा था कि हॉस्टल में जितना हो सके उतना ही काम करना। हॉस्टल गए तो कहा कि तुम्हें 50 लोगों का खाना बनाना है। संडे को स्पेशल डाइट बनेगी। दर्द सुनाते हुए लड़की रो पड़ी। गला रुंध गया। आवाज बैठ गई। पत्रकार ने हिम्मत देते हुए कहा- बोलो, बोलोगी नहीं तो आवाज कैसे पहुंचेगी? आवाज पहुंचाने ये कर्मचारी अब किरोड़ी बाबा से उम्मीद कर रहे हैं। उनके आवास पर डेरा डाल दिया। नारे लगाए- राजस्थान का एक ही लाल किरोड़ी लाल। अब देखते हैं कि किरोड़ी बाबा कौन सी तरकीब लगाएंगे? 3. चलते-चलते.. हाल ही राजस्थान के कोटा में भयानक बस हादसा हुआ। बताया जा रहा था कि ड्राइवर उनींदा था। ठीक से सो नहीं पाया था। उसी हालत में गाड़ी चला रहा था। नींद बहुत जरूरी है। सड़क पर चलते वक्त खास सावधानी बरतनी चाहिए। कभी-कभी हर व्यक्ति अपने काम के ट्रैक से भटक जाता है। ऐसे में अगर कोई अचानक छोटा सा मार्गदर्शन कर दे तो बात बन सकती है। हनुमानगढ़ के ट्रैफिक इंचार्ज हैं अनिल चिंदा। अपने खास अंदाज के कारण जाने जाते हैं। ड्राइवरों को खास तौर पर आगाह करते हैं और जिस अंदाज में करते हैं, उसका असर यकीकन ड्राइवर के दिमाग में रहता होगा। हरियाणा से राजस्थान सीमा में आने वाली एक रोडवेज बस को इंचार्ज साहब ने रुकवाया। ड्राइवर-कंडक्टर हैरान थे कि चालान कटेगा। इंचार्ज ने दोनों को बस से उतरने को कहा। इंचार्ज का चेहरा देख दोनों के चेहरे खिल गए। ये साहब रील में बड़े फेमस हैं। चालान से ज्यादा इनका ध्यान जगाने में रहता है। इंचार्ज ने कहा- हरियाणा रोडवेज पर लिखा होता है ‘हरियाणा शक्ति’ ऐसा क्यों? ड्राइवर-कंडक्टर एक दूसरे का मुंह ताकने लगे। इंचार्ज ने बात आगे बढ़ाई- इसे हरियाणा का जहाज भी कहते हैं। दोनों बोले- हां, कहते हैं। इंचार्ज ने कहा- तो फिर बस को हवाई जहाज मत बना देता। आराम से चलाना। कहीं सड़क पर जहाज बना दो। ड्राइवर बात समझ गए। मुस्कुराते हुए बस में बैठे और ठीये की ओर चले। बस का तो समझ आता है। लेकिन बाइक वालों का क्या करें? इंचार्ज साहब ने एक बाइक वाले को पकड़ा, जिसने टायरों में बल्ब की सजावट कर रखी थी। इंचार्ज ने उसे डांटा- अरे, ये हवाज जहाज है क्या भाई। जवाब तो दे। इनपुट सहयोग- महेंद्र सैनी , रिषभ सैनी (जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News