September 10, 2026

नमस्कार, राजनीति में कई दिग्गजों को आंखें दिखाने वाले हेमाराम की आंखें नम हुईं तो पूरा माहौल ही भावुक हो गया। एक कर्ज वो भी नहीं चुका पाए। सचिन पायलट को आजकल पुराने दोस्त फिर याद आने लगे हैं। विधायकजी ने पेट्रोल भरने वाले और बाइक दोनों को संभाला तो संभलने वाला भी हैरान रह गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ‘कर्ज’ का जिक्र कर भावुक हुए हेमाराम राजनीति में शब्दों के मायने भी अलग होते हैं। इस पाठशाला में शब्दों का वो अर्थ नहीं होता जो वे समझे जाते हैं। बालोतरा के धोरीमन्ना में पूर्व सरपंच स्व. गोरधनराम कड़वासरा की मूर्ति का अनावरण कार्यक्रम था। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी जब मंच पर अपनी बात साझा करने पहुंचे। उन्होंने कहा- गोरधन जी पर मेरा कर्ज है जिसे में चुका नहीं पाया। ऐसा कहने के बाद हेमाराम रुके। उनका गला भर आया। आंखों में रुलाई फूट पड़ी। माहौल भावुकता से भर गया। वहां मौजूद सचिन पायलट ने पानी की बोतल पहुंचाने का इशारा किया। पानी पहुंचाया गया। हेमाराम जी ने एक घूंट पानी पिया फिर बात आगे बढ़ाई। गोरधन जी का मुझ पर कर्जा है जिसके मूलधन की मैंने सिर्फ एक किस्त चुकाई। बाकी का कर्ज चुकाना शेष है। गोरधन राम कड़वासरा ने कभी पद या कुर्सी की राजनीति नहीं की। समाजसेवा ही उनका मूल कर्म रहा। लोगों की आवाज उठाना उनका उद्देश्य था। दरअसल हेमाराम चौधरी ने गोरधन जी से पैसों का कर्ज नहीं लिया था। वे कड़वासरा के राजनीतिक और सामाजिक उपकारों के कर्ज की बात कर रहे थे। हेमाराम ने मूलधन की एक किश्त चुकाने का जिक्र किया, इससे उनका मतलब कड़वासरा के परिवार के प्रति अपनी राजनीति जिम्मेदारी निभाने का इशारा था। इस बयान के जरिए सीनियर नेता ने अपने दिवंगत साथी के लिए सम्मान, सहयोग और एहसान स्वीकार करने का भाव दिखाया। 2. पायलट का दोस्ती वाला किस्सा राजनीति में आपदा कभी-कभी अवसर बन जाती है। जैसे कांग्रेस के कार्यकर्ता जयकिशन जी के लिए बन गई। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बालोतरा के धोरीमन्ना में एक कमाल का किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा- मैं क्षेत्र के दौरे पर था। तब हमारी सरकार नहीं थी। मैं सर्किट हाउस में ठहरा। रात में लाइट चली गई। जून का महीना। भयंकर गर्मी। न कूलर- न पंखा। मैंने सुखराम विश्नोई जी को परेशानी बताई। वे मुझे एक कार्यकर्ता के घर ले गए। कार्यकर्ता थे जयकिशन जी। हम उनके घर जाकर पड़ गए। उन्होंने भी खूब आवभगत की। सुबह जब हम उठे तो मैंने जयकिशन जी से कहा- आपकी हमारी दोस्ती पक्की। तब जयकिशन जी ने कहा- नहीं, अभी कोई दोस्ती नहीं। अभी तो आप विपक्ष में हो। जब सत्ता में रहो तब घर आइयेगा। तब मानूंगा कि हमारी दोस्ती हो गई है। सचिन पायलट ने कार्यकर्ता की बात याद रखी। कुछ समय बाद चुनाव आए। कांग्रेस की जीत हुई। सचिन पायलट अब सरकार का हिस्सा थे। एक बार फिर वे क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे। इस बार पूरा सरकारी लवाजमा था। पायलट बोले- मैं सर्किट हाउस में नहीं रुकूंगा। सीधे जयकिशन जी के घर ले चलो। जयकिशन जी के घर लाव-लश्कर लेकर हम पहुंच गए। अब किसी के घर सरकार ही आ जाए तो उसकी हालत क्या होगी? जयकिशन जी एक टांग पर नाचने लगे। खूब आवभगत की। फिर बोले- हां, अब मानता हूं कि हमारी दोस्ती हो गई है। किस्सा सुनकर सभी लोग ठहाका मारकर हंस पड़े। इस दौरान जयकिशन जी भी मंच के पास मौजूद थे। 3. विधायकजी ने बाइक सवार को संभाला चुनावी मौसम में अगर नेताजी को समाजसेवा दिखाने का सुअवसर मिल जाए तो इससे बढ़िया किस्मत कनेक्शन क्या होगा। सिविल लाइंस विधायक धुली हुई शुभ्र धवल पोशाक में अपने वाहन से एमआई रोड से गुजर रहे थे। गले में पीत पटका। सब कुछ सही था। अचानक उन्होंने देखा कि बाइक सवार एक बुजुर्ग पेट्रोलपंप कर्मचारी संतुलन खोकर सड़क पर गिर गया। विधायकजी ने तुरंत गाड़ी रुकवाई। घायल के पास पहुंचे। हाथ पकड़कर उसे साइड में ले गए। सवार का हेलमेट उतारा और संभावित जख्मों पर उंगलियां फिराकर चेक किया। सवार को समझाया कि देखो तुमने हेलमेट लगा रखा था इसलिए तुम्हारी जान बच गई। इसके बाद मरहम पट्‌टी के लिए कुछ रकम गुपचुप तरीके से घायल की हथेली में टिका दी। सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह रही कि समाजसेवा के पल-पल को मोबाइल कैमरे में कैद किया गया। तत्पश्चात बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ सोशल मीडिया पर चिपका दिया गया। नेताजी की समाजसेवा सफल रही। 4. चलते-चलते.. चुनावी टिकट उस अनार की तरह है जिसकी लालसा 100 बीमारों को रहती है। लेकिन मिलता किसी एक को है। ऐसे में बाकी लोग 99 के फेर में फंस जाते हैं। भीलवाड़ा में टिकट कटने के बाद भाजपा महिला कार्यकर्ताओं में बेचैनी रही। वार्ड 61 से जिलामंत्री रहीं शोभिका जगेतिया को टिकट की पूरी आशा थी। लेकिन टिकट नहीं मिला। इसके बाद से वे लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और जमकर खरी-खरी सुना रही हैं। टिकट से महरूम रही महिलाओं को उन्होंने कहा- जाजम उठाने वाली बहनों क्या हाल हैं? कैसा झटका लगा? यहां 30-30 साल से जाजम उठाकर क्या मिला? इससे अच्छा घर की जाजम उठातीं। क्योंकि टिकट तो सक्रिय भाभियों और सक्रिय पत्नियों को मिल गया। अब क्या करोगी? जो महिलाएं कभी घरों से नहीं निकलीं वे अब घर बैठे टिकट पाकर उल्टे पल्ले की साड़ी पहनकर मोहल्ले भर में राम-राम करते घूम रही हैं। घूमने की कहां जरूरत पड़ रही है। जब टिकट घर बैठे मिल गया तो वोट भी घर बैठे मिल जाएगा और काम भी घर बैठे ही हो जाएंगे। अब तो जनता का फर्ज बनता है कि ऐसी महिलाओं से पूछें- हू आर यू? वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।

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