November 1, 2026

एक ही कंपनी से 40 विला खरीदने के मामले में एसीएस शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर को एपीओ कर दया गया है। कार्मिक विभाग ने प्रशाखा माथुर को एपीओ करने के आदेश जारी कर दिए हैं। एक दिन पहले ही शिखर अग्रवाल के खिलाफ इस मामले में एसीबी जांच के आदेश दिए गए थे। एसीबी ने मामले में प्राथमिक इंक्वायरी (PE) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब आईपीएस प्रशाखा माथुर को पद से हटा दिया है। वे 24 अक्टूबर 2025 से एडीजी, प्लानिंग मॉडर्नाइजेंशन वेलफेयर के पद पर थीं। इससे पहले 29 अक्टूबर की रात को राजस्थान सरकार ने IAS शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाते हुए एपीओ कर दिया था। शिखर अग्रवाल पर पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। प्रशाखा माथुर के नाम से भी एक ही कंपनी से विला खरीदे थे IPS प्रशाखा माथुर के नाम से भी उसी कंपनी से विला खरीदे गए थे जिससे शिखर अग्रवाल ने खरीदे थे। अंनता रिजॉर्ट के 40 विला में से प्रशाखा माथुर के नाम से भी हिस्सेदारी हैं, इनमें कुछ का जिक्र सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न में हैं, लेकिन अलवर में की गई खरीद का जिक्र आईपीआर में नहीं है। विला खरीद मामले में प्रशाखा माथुर के खिलाफ भी जांच संभव विला खरीद मामले में शिखर अग्रवाल के खिलाफ एसीबी जांच शुरू हो चुकी है। अब माना जा रहा है कि प्रशाखा माथुर को भी जांच का सामना करना पड़ सकता है। हितों के टकराव, पद के दुरुपयोग के मामले में एसीबी अब जांच आगे बढ़ाने पर प्रशाखा माथुर से भी पूछताछ कर सकती है। 1995 बैच की IPS हैं प्रशाखा माथुर, आईबी में डिप्टी डायरेक्टर रह चुकीं डॉ. प्रशाखा माथुर अजमेर मूल की ​हैं। उन्होंने MBBS करने के बाद सिविल सर्विसेज जॉइन की। प्रशाखा माथुर 1995 बैच की आईपीएस हैं। प्रशाखा माथुर पुलिस में वरिष्ठ पदों पर रही हैं। वे जोधपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा, पाली की एसपी रह चुकी हैं। केंद्र सरकार में भी डेपुटेशन पर रही है। वे 2009 से 2014 तक आईबी में ​एडीशनल डिप्टी डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर रह चुकी हैं। एसीबी डीजी सीएस से मिले, फिर पीई दर्ज इससे पहले 30 अक्टूबर को सुबह एसीबी डीजी गोविंद गुप्ता ने मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से मुलाकात कर इस मामले में चर्चा की थी। मुख्य सचिव ने इस मुलाकात की फोटो को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि एसीबी डीजी के साथ मुलाकात कर भष्ट्राचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति को अमलीजामा पहनाने के बारे में विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि मुख्य सचिव से एसीबी डीजी की शिखर अग्रवाल मामले में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद एसीबी में पीई दर्ज कर ली गई। कंपनी को रिसोर्ट निर्माण की शर्तों में छूट दी IAS शिखर अग्रवाल पर निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों से कथित आपराधिक मिलीभगत कर अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए स्वयं एवं संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिखर अग्रवाल ने राजस्थान में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापन के दौरान जिला कलेक्टर, उदयपुर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं अन्य विभागों के पदों पर रहते हुए कथित रूप से अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से विला-कॉटेज खरीदे, जो ‘अनंता’ नाम से होटल एवं रिसोर्ट संचालित करती है। शिखर अग्रवाल ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटे के निदेशकों से मिलीभगत कर कंपनी को रिसोर्ट निर्माण संबंधी शर्तों में अनुचित छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां तथा विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलयाकर अनुचित लाभ पहुंचाया। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि शिखर अग्रवाल की ओर से उक्त कंपनी के संचालकों से कथित मिलीभगत कर स्वयं एवं अपने परिजनों के नाम पर उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसोर्ट में मार्च 2026 में 20 विला और अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता ली गई। पति-पत्नी के नाम पर अलग-अलग विला उदयपुर स्थित बुझड़ा रिसोर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला 15-15 लाख रुपए में खरीदे हैं, जबकि अलवर के अजबगढ़ के अनंता रिसॉर्ट में अग्रवाल एवं उनकी पत्नी के नाम पर 8 विला 16.5-16.5 लाख रुपए में, दोनों बेटों के नाम पर 4 विला लगभग 15-15 लाख और सास-ससुर के नाम पर 4 विला लगभग 16.5-16.5 लाख रुपए में खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों का खरीद कथित तौर पर बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर किया गया। गोपनीय सूत्रों से सामने आया है कि वित्त विभाग की ओर से प्राइवेट कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज 27 मार्च को जारी किया गया। उसी दिन शिखर अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री करवाई गई है। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि शिखर अग्रवाल की ओर से अपने पदस्थापन के दौरान निजी कंपनी के निदेशकों के साथ कथित आपराधिक मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त खुद के और परिजनों के नाम पर कथित रूप से आय से अधिक परिसंपत्तियां अर्जित किए जाने के तथ्यों की भी विस्तृत जांच किया जाना आवश्यक पाया गया। ये खबरें भी पढ़ें… 40-विला खरीद में IAS शिखर अग्रवाल की जांच करेगी ACB:पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी; पद का दुरुपयोग कर कंपनी को गलत फायदा पहुंचाया विला-कॉटेज खरीद मामला,IAS शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाया:IPS पत्नी के साथ खरीदी थी प्रॉपर्टी, फिर उसी कंपनी को लीज पर दी क्यों गिरी शिखर अग्रवाल पर गाज?:33 साल की नौकरी में पहली बार एपीओ, सरकार का क्लियर मैसेज, क्या संपत्ति खरीदना गलत? आसान सवालों में जानिए गहलोत बोले- शिखर अग्रवाल की CBI-ED से जांच करवाएं:एपीओ करने से काम नहीं चलेगा; सरकार के 3 साल में यह सबसे बड़ा घोटाला

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