पाकिस्तान बॉर्डर से सटे श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी इलाके में 12 अक्टूबर को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की आरडीएक्स और हथियारों के खिलाफ की गई कार्रवाई शक के घेरे में आ गई है। कार्रवाई का मास्टरमाइंड ANTF का ही एक कॉन्स्टेबल बताया जा रहा है। यह कॉन्स्टेबल पंजाब के दोनों बदमाशों लखविंदर और सुखविंदर से कार्रवाई से पहले ही मिला हुआ था। कॉन्स्टेबल ने अपने ही एक सोर्स से इन बदमाशों को वह मोबाइल उपलब्ध कराया, जिससे पाकिस्तान में बैठे विस्फोटक और ड्रग्स डीलर चाचा मिया से डील की। हालांकि ANTF आईजी का कहना है कि आरोप गलत है, जांच में सच सामने आ जाएगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सुखविंदर और लखविंदर पंजाब के फज्लिका थाने पर ग्रेनेड हमले के मामले में फरार थे। उन्हें गिरफ्तार कराने के बजाय कॉन्स्टेबल ने उन्हें वांटेड तस्कर रघुवीरसिंह की मदद से शरण दी। इतना ही नहीं ड्रापिंग पॉइंट पर एक कार व एक बाइक से रेकी की गई थी। कॉन्स्टेबल की मूवमेंट भी वहीं थी। पूरे मामले में सबसे बड़ा शक टाइमिंग और गोपनीयता को लेकर हो रहा है। 3 कारणों से शक के घेरे में पूरी कार्रवाई ANTF कॉन्स्टेबल की भूमिका पर इसलिए संदेह… ANTF को यह करना था बॉर्डर पार से हथियारों की तस्करी का इनपुट मिलने पर टीम को स्थानीय पुलिस, सीआईडी और बीएसएफ जैसी सहयोगी बॉर्डर एजेंसियों के साथ इंफॉर्मेशन शेयर कर संयुक्त रूप से नाकेबंदी करनी थी, ताकि आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा जा सके। पंजाब में ब्लास्ट कर भागे सुखविंदर और लखविंदर नाम के बदमाशों के बारे में लोकल पुलिस के माध्यम से पंजाब पुलिस तक इनपुट देना था। पंजाब में फरार ड्रग्स तस्कर रघुवीरसिंह की गिरफ्तारी के लिए लोकल पुलिस को सूचना देनी थी। …लेकिन किया ये टीम ने अन्य एजेंसियों को दरकिनार किया। वांटेड अपराधियों के जरिए आरोपियों को पनाह दिलवाई और खुद ही डिलीवरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर आरडीएक्स को आगे बढ़ने दिया। यह साफ तौर पर ‘कंट्रोल्ड डिलीवरी’ या ‘प्रायोजित स्टिंग’ का रूप ले चुका था। जानिए क्या हुआ था 12-13 अक्टूबर की रात रात 9.30 बजे एएनटीएफ के कॉन्स्टेबल और उसकी टीम ने रावला मंडी के 12 केएनडी (चक 4 केएनएम) इलाके में पंजाब के दोनों बदमाशों को भारी मात्रा में RDX, तुर्की निर्मित पिस्तौल और 650 से अधिक जिंदा कारतूसों के साथ पकड़ा। 10 बजे रावला मंडी थाने के दो कॉन्स्टेबल मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद एएनटीएफ की टीम ने दबाव बनाकर उन्हें मौके से वापस भेज दिया। रात 11 से सुबह 4 बजे तक इस संवेदनशील रिकवरी की जानकारी न तो रावला थाना प्रभारी को दी, न सीमा पर तैनात बीएसएफ (BSF) को और न ही लोकल इंटेलिजेंस/सीआईडी को। सुबह 8 बजे बाद रावला मंडी थाने में आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और यूएपीए (UAPA) की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। दोपहर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एएनटीएफ के उच्चाधिकारियों ने जयपुर से बम निरोधक दस्ता बुलाया और सीआईडी एएसपी की मौजूदगी में रावला के सुनसान इलाके में ही तीन धमाके कर उस आरडीएक्स को नष्ट (डिफ्यूज) कर दिया। इस जल्दबाजी पर सवाल भी उठने लगते हैं। आईजी का दावा: आरोप गलत, जांच में सच सामने आ जाएगा ANTF आईजी विकास कुमार का कहना है- हमारी टीम ने बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। बदमाशों के पाकिस्तान नेटवर्क का खुलासा किया है। ANTF की टीम में शामिल कॉन्स्टेबल की किसी तरह की संदिग्ध भूमिका की मुझे जानकारो नहीं है। ऐसे आरोप गलत है। ATS जांच भी कर रही है। जांच में सब सामने आ जाएगा। एक्सपर्ट व्यू: बॉर्डर पार से हथियार ड्रॉपिंग होने पर बीएसएफ और इंटेलिजेंस को सूचना देना जरूरी बीएसएफ के रिटायर्ड आईजी मूलचंद पंवार ने बताया- बॉर्डर पार से हथियार या अन्य किसी तरह की विस्फोटक सामग्री गिराए जाने पर सबसे पहले लोकल पुलिस को सूचना मिलते ही बीएसएफ के साथ बॉर्डर इंटेलिजेंस एजेसियों को सूचना देना जरूरी है। बीएसएफ की इंटेलिजेंस एजेंसी की रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय ऐसे मामले की जांच NIA को देती है। इस केस में किसी एजेंसी ने हथियार जब्त किए, तो बीएसएफ या बॉर्डर इंटेलिजेंस को सूचना देरी से क्यों दी? एनआईए या अन्य इंटेलिजेंस एजेंसी इसका पता लगाएगी।
