नमस्कार, राजस्थान में एक चरण की वोटिंग हो चुकी, इधर डोटासराजी खुद एक चरण के हो गए हैं। जोधपुर में एयरपोर्ट थाना इंचार्ज के साथ पार्षद प्रतिनिधि की गरमा-गरमी हो गई। भीलवाड़ा में नई एंबुलेंस को पुलिस ने रोक लिया और पाली में वोटिंग करा रहे साहब पर फर्जी मतदान का आरोप लग गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. SHO साहब के साथ ‘गरमा-गरमी’ हाल ही डीजीपी राजीव कुमार शर्मा साहब ने तीन दिवसीय ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग- सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम’ का शुभारंभ किया था। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिसवालों को नरमाई से पेश आने के गुर सिखाना था। डीजीपी साहब ने पुलिसवालों से कहा कि दूसरों से आप वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप खुद के लिए चाहते हैं। कार्यक्रम का नाम सरल हिंदी में रखा जाता और पुलिसवालों को सीधे तरीके से सिखाया जाता कि क्या करना है और क्या नहीं, तो ज्यादा उचित रहता। कुछ पुलिसवालों ने डीजीपी साहब की बात को शायद उल्टे तरीके से समझ लिया। जैसे- कोई तुम्हारे साथ जैसा व्यवहार करे, तुम भी उसके साथ वैसा ही व्यवहार करो। इसकी बानगी जोधपुर के एयरपोर्ट थाना परिसर में नजर आ गई। हुआ यूं कि पार्षद प्रतिनिधि का भतीजा बाइक लेकर घूमने निकल लिया। थाना इंचार्ज साहब के मुताबिक एक बाइक पर 3 जने थे, उन्हें पकड़ कर थाने ले आए। पार्षद प्रतिनिधि ने इंचार्ज को फोन किया तो बोले- अगर पुलिस से गाली गलौज करेंगे…अगर (गाली देते हुए) एक गाड़ी पर बिना हेलमेट तीन बैठकर जाएंगे तो क्या करेंगे? इंचार्ज के मुंह से गाली सुनकर पार्षद प्रतिनिधि थाने पहुंच गए। इंचार्ज को रिकॉर्ड किया हुआ ऑडियो सुनाया। इंचार्ज साहब कमर पर मुट्ठी रखकर हनुमानजी की तरह तनकर खड़े हो गए। अधीनस्थ सिपाही भी उसी मुद्रा में खड़ा हो गया। इंचार्ज ने कहा- हां, दी है मैंने गाली। फिर गाली देते हुए बोले-अगर एक गाड़ी पर बिना हेलमेट… हॉट-टॉक शुरू हो गई। प्रतिनिधि बोले- ये आपकी भाषा उचित है क्या? इंचार्ज ने बेपरवाही से कहा- ये ही भाषा है मेरी तो। जिन्होंने पुलिस को गाली दी है उन्हीं को गाली दी। इसके बाद बातचीत- बाहर जाइये, नहीं जाएंगे, क्या करोगे? ऊपर बात करेंगे, तो ऊपर जाकर बात करो- जैसे तीखे और छोटे सवाल-जवाब के साथ होती हुई निष्कर्षहीनता तक पहुंच गई। गनीमत रही कि दोनों में से किसी ने आपा नहीं खोया। 2. गांव में एंबुलेंस का आगमन एक चिड़िया है जिसका नाम आचार संहिता है। चुनावी मौसम में यह चिड़िया बहुत फुदकती है। बात भीलवाड़ा के टिकड़ गांव की है। सरपंच प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। वोटर को अपने पाले में लाने की तमाम कवायदें की जा रही थी। इस बीच गांव को नई एंबुलेंस की सौगात मिल गई। यूं तो एंबुलेंस का इस्तेमाल मरीज को कुशलता पूर्वक चिकित्सालय पहुंचाना होता है। लेकिन विशेष परिस्थितियों में एंबुलेंस प्रत्याशी को सरपंच की कुर्सी तक भी पहुंचा सकती है। गांव में एंबुलेंस ‘च्याऊं-च्याऊं’ करती दाखिल हुई तो पुलिस ने रोक लिया। दलील दी कि आचार संहिता लगी हुई है, एंबुलेंस से प्रचार किया जा रहा है। सरपंच प्रत्याशी जिद पर आ गए। एंबुलेंस से कैसे प्रचार हो रहा है? पुलिस अपनी बात पर कामय रही- नहीं, एंबुलेंस को थाने ले जाएंगे। सरपंच प्रत्याशी ने बहस की- सवाल ही नहीं उठता। पुलिस और सरपंच प्रत्याशी के बीच नोक-झोंक होने लगी। गांव इकट्ठा हो गया। एंबुलेंस के सामने पुलिस की गाड़ी अड़ गई। बड़े साहब को फोन लगाया गया। बड़े साहब की सरपंच प्रतिनिधि से बात कराई गई। साहब ने कहा- सीधे तरीके से गाड़ी थाने पहुंचा दो वरना सरपंच कोई और ही बनेगा यहां। सरपंच प्रत्याशी ने भी घुटने नहीं टेके, आवाज का स्केल बढ़ाकर कहा- कोई तकलीफ नहीं है, गांव का सरपंच कोई और बन जाएगा, लेकिन पुलिस की दादागिरी चलने नहीं देंगे। हुआ भी यही, पुलिस एंबुलेंस को थाने नहीं ले जा सकी। 3. साहब ने बड़ी मम्मी का फर्जी मतदान कराया मतदान के लिए कतार लगी थी। एक-एक कर ग्रामीण वोट डाल रहे थे। पीठासीन अधिकारी निष्ठा से ड्यूटी बजा रहे थे। हालांकि यह जांच का विषय है कि उनकी निष्ठा किसमें है? मामला पाली जिले का है। जिला का एक क्षेत्र मेहंदी के पक्के रंग के लिए जाना जाता है। वह है सोजत। सोजत के गांव केलवाद में बूथ नंबर 52 पर उक्त पीठासीन अधिकारी मुस्तैदी से मतदान करा रहे थे। इस दौरान एक दिव्यांग महिला मतदाता वोट डालने आई। साहब को उसकी मदद करनी पड़ी। मतदान किया ही जा रहा था कि अचानक भूचाल आ गया। दिव्यांग महिला किसी जुझारू भतीजे की बड़ी मम्मी निकली। एक युवक मोबाइल कैमरा चालू करके बूथ में घुस गया और पूरा फोकस पीठासीन अधिकारी पर डालते हुए चिल्लाया- ये पीआरओ साहब हैं। झूठे वोट करवा रहे हैं। पीठासीन अधिकारी की पीठ अकड़ गई। चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। बैठे के बैठे रह गए। जुझारू भतीजा लपक कर ईवीएम की तरफ पहुंच गया। अपनी बात को आगे बढ़ाया। बोला- ये ईवीएम मशीन है। मेरी बड़ी मम्मी ने फलां पार्टी को वोट दिया था लेकिन इन्होंने फलां पार्टी का बटन दबा दिया। जुझारू भतीजे ने दूसरी ईवीएम दिखाई, कहा- इसमें वोट डलना बाकी है। वह रफ्तार से दोबारा पीठासीन साहब की तरफ पहुंचा और बोला- ये झूठा आदमी है। फ्रॉड है। इसने फ्रॉड किया है। चर्चा है कि हंगामा होने के बाद पीठासीन अधिकारी को तुरंत हटाया गया। अब जांच होगी। 4. चलते-चलते.. पंचायत चुनाव की चिल्लम-चिल्ली जारी है। कहीं सुनहरे वादे किए जा रहे हैं। कहीं सौगात बांटने की होड़ मची है। कहीं जनता जनार्दन के कदम चूमने की कवायद है। कहीं प्रत्याशी को केलों से तौला जा रहा है। कहीं किसी दांव सटीक बैठ रहा है। कहीं निशाना चूक रहा है। कहीं फर्जीवाड़े के आरोप हैं। कहीं आरोप के पीछे ‘बिग डैडी’ हैं। सरपंच 7 हजार से कुछ ही ज्यादा मंथली सैलरी पाता है। फिर इस पद के पीछे इतना हाहाकारी माहौल क्यों? कुछ सवालों के अनंत जवाब होते हैं। यह सब राजनीति है। इसे समझने वाले ही समझते हैं। अभी एक चरण हुआ है। आगे-आगे न जाने क्या-क्या दिख जाए। चरण से याद आया कि पीसीसी चीफ साहब भी एक चरण पर आ गए हैं, क्योंकि दूसरे चरण पर पट्टी बंधी है। कमिश्नरेट में दमदार धरना-प्रदर्शन के बाद अब मोच खाए चरण को लेकर व्हीलचेयर से ही संगठन संभाल रहे हैं। एक पैर के सहारे वे जंग का ऐलान कर रहे हैं। दिग्गजों को जुटाकर नारे लगवा दिए- लड़े हैं, लड़ेंगे…जीते हैं, जीतेंगे। इनपुट सहयोग- ओम टेलर (पाली), स्मित पालीवाल, रिषभ सैनी (जयपुर), वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
