उदयपुर में 2 करोड़ के रिश्वतकांड में घिरे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के एएसपी मुकेश सोनी को लेकर डेली नए खुलासे हो रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के सूत्रों ने बताया कि सोनी को एसीबी कार्रवाई को लेकर पहले से शक था। इसलिए वो परिवादी पर नजर रख रहा था। उसे फंसाने के लिए एसीबी ने एक प्रशासनिक अधिकारी की मदद ली। वहीं, गिरफ्तारी के बाद से मुकेश सोनी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है। बीते 5 दिन से जांच अधिकारी उसका आईफोन अनलॉक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आरोपी मुकेश सोनी पासवर्ड नहीं बता रहा है। बुधवार को आरोपी एएसपी और दलाल सज्जन सिंह की रिमांड 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी। अब तक हुई पूछताछ में क्या-क्या हुआ? एसीबी ने सुनाई रिकॉर्डिंग: जमीन घोटाले में रिश्वत मांगने के आरोपी मुकेश सोनी ने पूछताछ में घूस मांगने से ही इनकार कर दिया था। जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि इस पर एसीबी ने उसे रिकॉर्डिंग सुनाई तो वो चुप हो गया। दलाल सज्जन सिंह ने पूछताछ में बताया कि उसने एएसपी के कहने पर ही परिवादी से कॉन्टैक्ट किया था। मोबाइल का पासवर्ड बताने से इनकार: रविवार (27 सितंबर) को गिरफ्तारी के बाद से मुकेश सोनी से पूछताछ हो रही है। अधिकारियों का दावा है कि वो सहयोग नहीं कर रहा है। उसके आईफोन में काफी अहम सबूत होने की आशंका है, लेकिन मुकेश सोनी उसका पासवर्ड नहीं बता रहा है। बीते 5 दिन में उससे कई बार पासवर्ड पूछने की कोशिश की गई है। इन सवालों का भी नहीं मिला जवाब: परिवादी के घर से डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) क्यों और किस कारण से जब्त किया। साथ ही परिवादी से 3 खाली चेक पर साइन क्यों कराए गए। इस सवाल पर भी स्पष्ट जबाव नहीं दिया। रिश्वत किन लोगों में बंटनी थी? इस सवाल का भी एएसपी ने कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट में एसीबी ने क्या दलील दी: बुधवार को दोनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया था। एसीबी का कहना था कि जांच अभी बाकी है। आरोपी भी अब भी बहुत कुछ जानकारी नहीं दे रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों की रिमांड 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी। अब पढ़िए- ACB के जाल में कैसे फंसा मुकेश सोनी? जांच एजेंसी के तौर-तरीकों की जानकारी थी: एसीबी सूत्रों ने बताया कि मुकेश सोनी को एसीबी कार्रवाई का शक था। उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि एसीबी कौन-कौन से तरीकों से उस तक पहुंच सकती है। वो एसीबी चौकी के लगभग हर अधिकारी और कर्मचारी को भी पहचानता है। परिवादी ने बताया एएसपी नजर रख रहा है: जानकारी के अनुसार परिवादी निरंजन मोगरा ने एसीबी को बताया कि मुकेश सोनी उसकी निगरानी कर रहा है। इसके बाद एसीबी ने अपनी रणनीति बदल दी। परिवादी को एसीबी ने अपने ऑफिस आने से रोक दिया। उससे कहा गया कि अधिकारी खुद उसके पास पहुंचेंगे। प्रशासनिक अधिकारी को प्लान में शामिल किया: मुकेश सोनी को जाल में फंसाया जा सके इसलिए एक प्रशासनिक अधिकारी को प्लान में शामिल किया गया। उसी अधिकारी के जरिए शिकायत का वेरिफिकेशन करवाया गया। चौकी के किसी कर्मचारी को शुरुआती कार्रवाई में शामिल नहीं किया गया। सब कुछ वेरिफाई होने के बाद दोनों आरोपियों को पकड़ा गया। अब जानिए- क्या है प्लॉट घोटाला? फर्जी डॉक्यूमेंट्स से बेचे गए थे प्लॉट: दरअसल, साल 2012 में यूआईटी ने कई कॉलोनियां निगम को ट्रांसफर की थीं। इनमें करोड़ों के प्लॉट खाली थे। आरोप है कि भू-माफियाओं और निगम अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से खाली जमीनों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार करवा लिए गए। फर्जी व्यक्तियों के नाम नामांतरण खोलकर उन्हें आगे महंगे दामों पर बेच दिया था। जेवर और 11 लाख रुपए जब्त किए थे: 2022 में निगम 272 प्लॉट घोटाले की FIR सूरजपोल थाने में दर्ज कराई गई थी। एसओजी ने 4 अगस्त को सुखेर निवासी पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था। उनके घर से 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए जब्त किए थे। इसी मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान छोड़ने के लिए रिश्वत ली गई है। …. ये खबर भी पढ़िए… उदयपुर- 2 करोड़ रिश्वत मामले में ASP गिरफ्तार:272 प्लॉट घोटाला केस में FR के लिए हुई थी डील, ASP और दलाल 3 दिन रिमांड पर एसीबी उदयपुर ने दो करोड़ की रिश्वत मामले में SOG के एडिशनल SP मुकेश कुमार सोनी को रविवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले शनिवार को एसीबी ने एएसपी के दलाल सज्जन सिंह जैन को 2 करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा था। पूरी खबर पढ़िए…
