राजस्थान से मानसून गए ठीक से एक महीना भी नहीं हुआ, लेकिन प्रदेश में अभी से पीने के पानी को लेकर विकट हालात पैदा हो गए हैं। 14 शहरों में 4 दिन में एक बार पानी मिल रहा है। 100 से ज्यादा शहरों में 48 घंटे बाद सप्लाई मिल रही है। सबसे विकट हालात पाली जिले के हैं। यहां कई गांवों में लोगों को 10 दिन बाद पीने का पानी नसीब हो रहा है। स्थिति इससे भी विकट हो सकती है। माइंस के गड्ढों से बूंद-बूंद पानी निकालकर लोगों की प्यास बुझाई जाएगी। कुछ जगहों पर तो महिलाएं एक मटका पानी के लिए रात भर जागती हैं। प्रदेश के ज्यादातर बांधों में भी कुछ महीने का पानी शेष है। दैनिक भास्कर ने प्रदेश में मानसून के बाद की स्थितियां देखीं तो ऐसी कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्यासे पाली के सबसे पहले पढ़िए हालात : 4 दिन में एक घंटे, गांवों में 96 घंटे बाद सप्लाई जलदाय विभाग जिले के शहरों में 72 घंटे और गांवों में 96 घंटे के भीतर पानी देने का दावा कर रहा है। अफसरों का कहना है कि दीपावली के बाद शहरों (पाली, मारवाड़ जंक्शन, सोजत, फालना) में 96 घंटे यानी 4 दिन में और गांवों में 120 घंटे यानी 5 दिन में एक बार ही पानी की सप्लाई होगी। लेकिन ग्राउंड लेवल पर हालात इससे भी विकट हैं। जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर केरली गांव में 10 दिन में पेयजल सप्लाई हो रही है। रात में मटकी लेकर पानी भरने जाती महिलाएं, 10 दिन बाद भी 20 मिनट पानी भालेलाव गांव : ये गांव पाली मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर है। खीवनी देवी ने बताया कि गांव में पानी की टंकी बने कई महीने हो चुके है। लेकिन सप्लाई अभी तक शुरू नहीं की है। एक टयूबवेल से छोटी टंकी (जीएलआर) में पानी भरा जाता है, वहां से मटकियों में पानी भरने के लिए उन्हें रात में जागना पड़ता है। खीवनी देवी ने बताया- दिन में बिजली नहीं रहती है, इसलिए रात में ट्यूबवेल चलाकर पहले जीएलआर को भरा जाता है। टंकी भरने के बाद घरों की औरतें रात के समय पानी लेने निकलती हैं। रात में अनहोनी का डर रहता है। लेकिन कोई परेशानी नहीं देख रहा है। उमकली गांव : रोहट कस्बे के उमकली गांव में हमारी मुलाकात सुरेश देवी से हुई। उन्होंने बताया कि हमारे यहां 10 दिन में एक बार थोड़ी देर के लिए पानी सप्लाई किया जा रहा है। हैंडपंप के खारे पानी से नहाते हैं। पशुओं को भी यही पानी पिलाते हैं। मीठे पानी के लिए कई किलोमीटर दूर खुदे टयूबवेल पर जाना पड़ता है। कानावास गांव : ये सोजत इलाके में आता है। यहां के निवासी तेजाराम ने बताया- आठ से दस दिन में एक बार नलों में पानी की सप्लाई हो रही है, उसमें भी नल में बूंद-बूंद पानी आता है। महज एक घंटे पानी सप्लाई में बूंद-बूंद पानी आने के कारण घर की मटकियों में भी पानी पूरा नहीं भरता है। ऐसे में हेंडपंप का खारा पानी पीना पड़ रहा है। भांगेसर गांव : सोजत इलाके के इस गांव में हमारी मुलाकात प्रकाश सेन से हुई। उन्होंने बताया कि गांव में पानी की टंकी तो बना दी, लेकिन दो साल से उसमें पानी नहीं आया है। लोगों को आज भी पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। पड़ताल : पाली में हालातों के पीछे असली वजह पाली जिले की पीने का 90 फीसदी से ज्यादा पानी बांधों से ही सप्लाई होता है। इस बार जिले में औसत के मुकाबले आधी से भी कम बारिश (221 एमएम) दर्ज हुई है। हेमावास, खारड़ा, गजनई, कंटालिया जैसे बांध सूखे पड़े हैं। जवाई बांध में भी मार्च 2027 तक का पानी शेष है। 155 करोड़ खर्च कर जोधपुर से 66 किमी पाइपलाइन बिछाकर पानी लाने काम बहुत धीमा है। अभी तक 26 किमी पाइपलाइन ही बिछ पाई है। कुड़ी से रोहट तक बिछी पाइपलाइन से महज 10 एमएलडी पानी मिल रहा है, जबकि जरूरत 30 एमएलडी की है। 125 करोड़ खर्च होंगे, माइंस के गड्ढों से पानी की सप्लाई जलदाय विभाग के एक्सईएन कानसिंह राणावत ने बताया कि 125.42 करोड़ का कंटीजेंसी प्लान भेजा है। 367 गांव-ढाणियों में टैंकर, 192 बोरवेल गांवों में और 41 शहर में खोदने का प्रस्ताव है। चूंकि जवाई बांध में पानी बहुत कम बचा है तो 1 दिसंबर से शहर में 96 तो गांवों में 120 घंटे के अंतराल में पानी सप्लाई किया जाएगा। गांवों में स्थानीय जल स्त्रोंत से भी पानी लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर माइंस से भी पानी लेना पड़ेगा। झुंझुनूं : चिड़ावा-पिलानी में 1100 फीट तक पहुंचा भूजल झुंझुनूं जिले के चिड़ावा और पिलानी में भी हालात डरावने हैं। 48 घंटे में सप्लाई मिल रही है। यहां भूजल स्तर 1100 फीट तक नीचे पहुंच गया है। निखिल चौधरी ने बताया कि चिड़ावा में करीब 150 ट्यूबवेल होने के बावजूद कई इलाकों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। आए दिन लोगों को धरना प्रदर्शन करना पड़ता है। चिड़ावा के लिए यमुना जल को स्थायी समाधान की उम्मीद माना जा रहा है। लेकिन इसके पहुंचने तक भूजल संकट से जूझ रहे इलाके मुश्किल में रहेंगे। पिलानी निवासी विकास कुमार ने बताया कि पानी की समस्या के आगे अब तो विभाग भी असहाय नजर आ रहा है। कई इलाकों में भूजल स्तर 800 से 1100 फीट तक नीचे चला गया है। जिन 150 ट्यूबवेल के भरोसे पानी की सप्लाई हो रही है, उनके दशकों पुराने पाइप लाइन भी जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते कई बोरवेल जवाब दे चुके हैं। चिड़ावा में अब भुजल के लिए अभियान चलाना चाहिए। बांधों में सिर्फ 62% पानी, पिछले साल के मुकाबले 28% कम स्टॉक जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 693 बांध हैं। इन बांधों का पानी ही प्रदेश की 8 करोड़ से ज्यादा आबादी की प्यास बुझाता है। इन बांधों की क्षमता 13,029.09 मिलियन क्यूबिक मीटर है। लेकिन इनमें 30 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार 8,098.46 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी बचा है। यानी बांधों में कुल क्षमता का सिर्फ 62.16% पानी ही शेष है। पिछले साल सितंबर तक बांध 90.19 फीसदी तक भरे हुए थे। तुलना करें तो इस बार 28 फीसदी कम पानी है। मानसून की शुरुआत से पहले 15 जून तक बांध 44.46 फीसदी भरे थे। बारिश से जो राहत मिली वो नाकाफी नजर आ रही है।
स्टेट और जिला एक्शन प्लान बनेगा कमजोर मानसून के बाद संभावित पेयजल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीएचईडी के चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी के अनुसार, पेयजल को लेकर कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। प्लान तैयार होने के बाद सक्षम स्तर से इसकी स्वीकृति ली जाएगी। मुख्य सचिव ने जल वितरण के लिए स्टेट एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों में पानी के वितरण के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही हर जिले की स्थानीय परिस्थितियों और पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तरीय एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। …. मौसम की ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान-2 इंच से ज्यादा बारिश, ओले गिरे, आज भी अलर्ट:फसलों को नुकसान, 5 डिग्री तक गिरा पारा, जयपुर में अचानक ठंड बढ़ी राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से मौसम बदल गया है। बारिश और ओलावृष्टि के कारण तापमान 5 डिग्री तक गिर गया है। जयपुर सहित कई जिलों में ठंडी हवा चल रही है। पूरी खबर पढ़िए…
