August 16, 2026

राजस्थान में जल्द ही यात्रियों को ले जाने वाले ‘पैसेंजर ड्रोन’ तैयार किए जाएंगे। इसके लिए जोधपुर में एक अत्याधुनिक लैब बनेगी, जहां ड्रोन की डिजाइनिंग और टेस्टिंग होगी। इसके अलावा, ‘ऋगवामिनिकी’ नाम की कंपनी पिछले डेढ़ साल से ‘एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी’ पर काम कर रही है। दावा है कि यह पूरी तरह से भारत में ही विकसित की जा रही स्वदेशी तकनीक है। इतना ही नहीं, इस ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के स्कूल और कॉलेज के बच्चों को ड्रोन बनाने और उनकी फ्लाइंग ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके लिए खास तौर पर एक एआई-बेस्ड मॉड्यूल तैयार किया गया है, जो घर बैठे ही ड्रोन की डिजाइन तैयार करने से लेकर उसे बनाने तक की पूरी जानकारी देगा। जोधपुर बनेगा ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब कंपनी के सीईओ जितेश त्रिवेदी ने बताया- हाल ही में ‘राइजिंग राजस्थान’ समिट के तहत फरवरी 2026 में उनका राज्य सरकार के साथ एमओयू (MoU) हुआ है। इसी प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर में एक अत्याधुनिक लैब तैयार की जा रही है। साथ ही जोधपुर में एक विशाल ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब भी स्थापित किया जाएगा। इसके लिए नागौर रोड पर नेतड़ा के पास और पाली रोड पर जमीन देखी गई है, जहां पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, ड्रोन में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स (पुर्जों) के लिए छोटी-छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भी स्थापित की जाएंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इन यूनिट्स में काम करने वाले लोगों को पहले विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। 150 से 200 किलो क्षमता वाले होंगे ‘पैसेंजर ड्रोन’ जितेश ने बताया- हमारी टीम ने हाल ही में एक ‘हैवी वेट लिफ्टिंग ड्रोन’ तैयार किया है, जो 15 से 20 किलोग्राम तक का वजन उठा सकता है। इसका उपयोग मेडिकल इमरजेंसी, इंडस्ट्री और डिलीवरी जैसे कामों में किया जा सकेगा। इसके अलावा, अब सितंबर या अक्टूबर महीने से वे ‘पैसेंजर ड्रोन’ पर काम शुरू करेंगे, जिसकी क्षमता 150 से 200 किलोग्राम तक की होगी (यानी यह इंसानों को हवा में ले जा सकेगा)। इसकी डिजाइन तैयार की जा चुकी है। अगले दो महीनों में इस पर जमीनी काम शुरू हो जाएगा और करीब 6 महीने में यह पैसेंजर ड्रोन बनकर तैयार हो जाएगा। एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी और बादलों में छिपने वाले ड्रोन जितेश ने कहा- वे ‘एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी’ पर भी काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे ‘हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस’ (HALE) ड्रोन पर काम कर रहे हैं, जो बहुत अधिक ऊंचाई पर काफी देर तक हवा में उड़ सकते हैं और इनकी रेंज भी बहुत ज्यादा होगी। ये ड्रोन इतने ऊंचे उड़ेंगे कि बादलों में छिपे रहेंगे और नीचे से दिखाई नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि अभी जो सामान्य ड्रोन बन रहे हैं, उनकी रेंज केवल 5 किलोमीटर तक होती है। लेकिन उनकी टीम अब 500 किलोमीटर की रेंज और 1500 मीटर की ऊंचाई तक उड़ने वाले ड्रोन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। जोधपुर में बनेगी देश की पहली ‘एआई ड्रोन लैबोरेट्री’ जोधपुर में एक विशेष ‘एआई ड्रोन लैबोरेट्री’ तैयार की जा रही है, जहां युवाओं को ड्रोन डिजाइन और डेवलपमेंट के बारे में सिखाया जाएगा। कंपनी ने एक ऐसा एआई टूल भी तैयार किया है, जो घर बैठे ही लोगों को ड्रोन बनाना सिखाएगा। कैसे काम करेगा एआई टूल (ड्रोन कैलकुलेटर): यूजर जैसे ही कंपनी की वेबसाइट पर जाएगा, वहां उसे ‘ड्रोन कैलकुलेटर’ का विकल्प मिलेगा। यहां यूजर को कुछ आसान विकल्प चुनने होंगे-जैसे ड्रोन का प्रकार क्या है, उसमें कौन सी मोटर लगेगी और प्रोपेलर (Propellers) कैसे लगाने होंगे। ये जानकारियां भरते ही एआई टूल तुरंत पूरी कैलकुलेशन करके बता देगा कि ड्रोन में कौन-कौन से पार्ट्स लगेंगे और यह भी बताएगा कि यह ड्रोन हवा में उड़ पाएगा या नहीं। 1000+ ड्रोन्स का लाइव डेटा: इसी वेबसाइट पर दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले 1000 से अधिक ड्रोन्स का डेटा लाइव किया गया है। यहां जाकर कोई भी यूजर उनकी डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक के बारे में मुफ्त में जानकारी ले सकता है। स्कूल-कॉलेज के छात्रों और प्रोफेसर्स को ट्रेनिंग प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को ड्रोन बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इतना ही नहीं, शिक्षकों के लिए ‘फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम’ भी चलाया जा रहा है, ताकि स्कूल-कॉलेज के टीचर्स और प्रोफेसर्स खुद ड्रोन टेक्नोलॉजी को सीखकर आगे बच्चों को सिखा सकें।

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