राजस्थान में विधायकों के वेतन वृद्धि की रिपोर्ट तैयार हो गई है। रिपोर्ट में डीए की तर्ज पर विधायकों का वेतन बढ़ाने जैसे बातें लिखी गई हैं। संसदीय कार्य विभाग ने स्टडी कर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को रिपोर्ट भेज दी है। राजस्थान में विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू हो गया है। ऐसे में सवाल है कि क्या वेतन वृद्धि संशोधन बिल इस सत्र में पेश होगा? बिल नहीं आया तो क्या होगा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… वेतन बढ़ोतरी के लिए करना होगा इंतजार विधायकों को वेतन बढ़ोतरी के लिए इंतजार करना होगा। वजह यह है कि सरकार विधायकों के वेतन बढ़ाने पर फैसला नहीं कर पाई है। वेतन बढ़ाने के लिए विधानसभा में सैलरी से जुड़ा संशोधन बिल पेश करना जरूरी है, जो अभी तैयार नहीं हुआ है। सीएम भजनलाल शर्मा ने 27 फरवरी, 2026 को राजस्थान वित्त एवं विनियोग विधेयक-2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए विधानसभा में विधायकों का वेतन बढ़ाने की घोषणा की थी। सीएम ने सदन में कहा था- विधायकों के वेतन में राज्य कर्मचारियों की तरह समय-समय पर महंगाई भत्ते (DA) के अनुसार बढ़ोतरी किया जाना प्रस्तावित है। ये प्रावधान आगामी वित्तीय वर्ष से लागू किए जाने की घोषणा करता हूं। घोषणा क्यों नहीं हो पाई पूरी? फरवरी, 2026 को विधायकों के वेतन बढ़ाने से जुड़ी सीएम की घोषणा के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रस्ताव बनाकर संसदीय कार्य विभाग को भेज दिया था। प्रस्ताव में कहा- सभी राज्यों में विधायकों को मिलने वाले वेतन का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट भेजें। इसके बाद संसदीय कार्य विभाग के अधिकारियों ने देश के सभी राज्यों में विधायकों को मिलने वाले वेतन का अध्ययन किया। अधिकारियों ने वेतन बढ़ोतरी पर बजट कितना चाहिए? सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ेगा समेत तमाम बिंदुओं का अध्ययन भी किया था। इसके बाद संसदीय कार्य विभाग ने अप्रैल में रिपोर्ट पर आधारित एक प्रस्ताव बनाकर वेतन बढ़ाने वाली फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेजी दी थी। तब से फाइल सीएमओ में ही है। 2021 में बढ़े थे विधायकों के वेतन भत्ते राजस्थान में विधायकों के वेतन भत्ते गहलोत राज के दौरान दिसंबर 2021 में बढ़ाए गए थे। विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्तों और पेंशन के लिए राजस्थान विधानसभा अधिकारियों और सदस्यों का परिलब्धियां और पेंशन अधिनियम 1956 बना हुआ है। इस कानून में अब हर साल वेतन और पेंशन बढ़ाने का प्रावधान करना होगा। इसके लिए विधानसभा में संशोधन बिल लाना होगा। वेतन वृद्धि के सवाल पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा का कहना है- हमारा काम जनसेवा का है। जब कार्यकर्ता आते हैं तो उनके लिए चाय-पानी की भी व्यवस्था करनी होती है। पहले जनप्रतिनिधि चुनिंदा कार्यक्रमों मे ही जाते थे, लेकिन आज जनता की अपेक्षा बढ़ गई है। वरिष्ठ पत्रकार महेश चंद शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन में कई बार प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय संसाधनों की कमी आड़े आ जाती है। विभागों के बीच तालमेल का अभाव, कानूनी अड़चनों और नियमों की लंबी प्रक्रियाओं के चलते भी घोषणाएं फाइलों में ही अटकी रह जाती हैं। यूसीसी बिल और ट्री प्रोटेक्शन एक्ट का क्या? विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल, खेजड़ी को बचाने के लिए ट्री प्रोटेक्शन एक्ट पेश कर सकती है। हालांकि चुनावों की आचार संहिता के कारण सरकार ये अहम बिल इस विधानसभा सत्र में पारित नहीं करा सकेगी। इन्हें नवबंर के आखिर में सदन बुलाकर फिर पारित करवाने की रणनीति है।
