August 17, 2026

राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले दिनों अलग-अलग विभागों में किए गए 468 अफसर, कर्मचारियों, स्कूल व्याख्याताओं और टीचरों के तबादलों पर रोक लगा दी है। यह रोक 15 दिन तक प्रभावी रहेगी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता अफसर-कर्मचारियों के मामले में विभागों को 15 दिन में सुनवाई करके उनके तबादलों पर मेरिट के आधार पर उनकी आपत्तियों का निस्तारण करने का आदेश दिया है। तब तक पहले किए ट्रांसफरों पर रोक रहेगी। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने डॉ. महेश मीणा और 468 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है। तबादलों पर रोक का आदेश केवल याचिकाकर्ताओं पर ही लागू होगा। सरकार ने जून में तबादलों से रोक हटाई थी। उस वक्त ट्रांसफर के खिलाफ 468 अफसर-कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। हाईकोर्ट ने इस पर पहले फैसला सुरक्षित रखा था, सोमवार को फैसला सुनाया। दो महीने में बनाएंगे ट्रांसफर पॉलिसी हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में ट्रांसफर पॉलिसी बनाने के लिए कमेटी बनाई है। कमेटी में रिटायर्ड हाईकोर्ट जज आलोक शर्मा, महाधिवक्ता और मुख्य सचिव शामिल हैं। कमेटी को दो महीने में ट्रांसफर पॉलिसी का फ्रेमवर्क तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट संदीप कलवानिया, अशोक बंसल, आशीष सक्सेना, हरेंद्र नील, गिरिराज राजोरिया, कपिल खंडेलवाल और धीरेंद्र सिंह ने पैरवी की।
रेट में अध्यक्ष, सदस्यों के पूरे पद भरने के आदेश हाईकोर्ट ने राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव ​ट्रिब्यूनल (रेट) को लेकर भी सरकार को आदेश दिए हैं। रेट का कामकाज सही तरीके से चलता रहे, इसके लिए उसमें समय पर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करने के आदेश दिए हैं। पिछले दिनों ही हाईकोर्ट ने रेट में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों को लेकर नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद सरकार ने रेट में दो रिटायर्ड IAS की मेंबर के पद पर नियुक्तियां की थीं। घोषणा-पत्रों में तबादला नीति बनाने के वादे, लेकिन लागू नहीं प्रदेश में हर सरकार के वक्त ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर ही तबादले करने की बातें चलती रहती है। कांग्रेस और बीजेपी ने हर बार अपने चुनाव घोषणा-पत्रों में पारदर्शी तबादला नीति बनाकर लागू करने के वादे किए हैं। लेकिन किसी भी सरकार ने इसे लागू नहीं किया। अब ट्रांसफर पॉलिसी का काम आगे बढ़ने के आसार हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब ट्रांसफर पॉलिसी का काम आगे बढ़ने के आसार हैं। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में पॉलिसी बनने से इसके प्रावधान उसी अनुरूप होने की संभावना है। हाईकोर्ट ने दो महीने में पॉलिसी बनाने की डेडलाइन दी है, इस लिहाज से इस पर तेजी से काम आगे बढ़ने के आसार हैं। तबादलों में हर सरकार के वक्त राजनीतिक दखल राजस्थान में पिछले कई दशकों से सरकारी तबादलों में सत्ताधारी दल के नेताओं, मंत्री, विधायकों की चलती आई है। सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के चहेते अफसर कर्मचारी लगाने की परंपरा बनी हुई है। सत्ताधारी नेताओं की डिजायर पर ही तबादले होते रहे हैं। डिजायर सिस्टम की वजह से तबादलों पर सवाल उठते हैं और इनमें गडबड़ी के आरोप लगते हैं। अब नई ट्रांसफर पॉलिसी में तबादलों पर राजनीतिक दखल रोकने के प्रावधान करने और उन्हें धरातल पर लागू करना असली चुनौती रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News