October 16, 2026

नमस्कार, पूर्व मुख्यमंत्रीजी के सामने ‘चौथी बार’ के नारे लग गए। दिल्ली में NSUI की सचिव महोदया के साथ महिला पुलिसकर्मी बस में ही गुत्थमगुत्था हो गई। जोधपुर में चोटी-पकड़ मास्टरजी ने सफाई दी और जयपुर में सितारों पर राजस्थान का रंग चढ़ गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. गहलोत समर्थक हैं कि मानते नहीं आलाकमान की महिमा न्यारी है। अब पब्लिक की इच्छा कुछ नहीं, वही होगा जो आलाकमान चाहेंगे। हर राजनीतिक दल का यही उसूल हो गया है। पब्लिक किसे सीट पर देखना चाहती है और आलाकमान किसी और को सीट पर बैठाना चाहते हैं। नेताजी को लोक-लुभावन बातें भी करनी पड़ती हैं और उससे ज्यादा आलाकमान-लुभावन बातें भी कहनी पड़ती हैं। बीकानेर के नाल बड़ी में पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस का सम्मेलन चल रहा था। पूर्व मंत्री बीडी कल्ला थे। पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल थे। लोगों का जमघट लगा था। शामियाने के नीचे धूप छनकर आ रही थी। आश्विन मास के बावजूद उमस का माहौल था। पूर्व मुखियाजी भाषण देने डायस पर पहुंचे और पसीने की धाराएं चलने लगीं। पसीना पोंछने और पानी पीने के दरमियान नारेबाजी होने लगी। जनता में से आवाज उठी-चौथी बार..गहलोत सरकार। चर्चा है कि पूर्व मंत्री मेघवालजी ने भी नारे लगवाए-हमारा सीएम कैसा हो, अशोक गहलोत जैसा हो। गहलोतजी ने नारेबाजों को रोका। बोले- तीन बार का सीएम कम होता है क्या? नारे मत लगाओ। ऐसे नारों से गलतफहमी हो जाती है। आप को फिर से कांग्रेस की सरकार बनाओ और बाकी आलाकमान पर छोड़ दो। पब्लिक ने बात मानते हुए बात आलाकमान पर छोड़ दी। लेकिन नारेबाजी की गूंज राजधानी में बैठे भाजपा प्रदेशाध्यक्षजी तक भी पहुंच गई। उन्होंने कह दिया-गहलोत जी सपने देख रहे हैं। सपने देखने में बुराई नहीं। सपना है या गलतफहमी। जो कुछ है समय के गर्भ में है। लेकिन एक बात तय है, वह ये कि गहलोत के समर्थन हैं कि मानते नहीं। हाल ही एक वीडियो सामने आया। पूर्व सीएम का एक समर्थक कोई एप्लीकेशन लेकर पहुंचा। बहुत सकुचाते हुए डिमांड रखी। बोला- सर आप पर ब्लैक वाली जैकेट बहुंच जंचती है। वही पहना करो। गहलोत हंसे। फिर बोले- सर्दी में पहनेंगे। 2. बस में गुत्थमगुत्था जंग राजस्थान में उन पुलिसवालों को एपीओ कर दिया गया जिन्होंने मिस-बिहेव किया था। किशनगढ़ में वकील तो सरे राह चांटा मारने वाली ट्रैफिक सीओ पर भी सख्ती दिखाई गई। लेकिन दिल्ली पुलिस आंदोलन को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान NSUI की सचिव रितु बराला समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने डिटेन किया। हिरासत में लेकर उन्हें बस में चढ़ा दिया गया। बस में रितु और एक महिला जवान की भिड़ंत हो गई। जवान काफी हट्‌टी-कट्‌टी थी। उसने रितु को उठाकर सीट पर पटका और बाल पकड़कर उस पर बैठ गई। रितु भी शेखावाटी इलाके से है, NCC कैडेट रही है। ताइक्वांडो सीखा है। ऐसे में उसने भी पैंतरे बहुत लगाए। चारों तरफ भीड़ जुटी रही। एक युवक चिल्लाया- वीडियो बनाओ वीडियो। साथी वीडियो बनाने लगे। जब पुलिस को पता लगा कि मामला बढ़ सकता है तो लेडी पुलिसकर्मी को प्राइवेट कार से मौके से रवाना कर दिया गया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने उसका पीछा भी किया। घटना को लेकर दिल्ली पुलिस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाए। रितु समेत 6 छात्र नेताओं को मीडिया के सामने कर दिया। सबने अपनी आपबीती सुनाई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कॉल करके रितु की तारीफ की। यानी लगता है गुत्थमगुत्था होने से राजनीतिक करियर का विमान टेक ऑफ कर गया है। 3. चोटी-पकड़ मास्टरजी की ‘सफाई’ नौकरी करना एक कला है। जिसके विविध आयाम होते हैं। नौकरी के साथ-साथ सहकर्मियों पर भी नजर बनाकर रखनी चाहिए। क्या पता कब कौन सहकर्मी आपकी पोल खोल दे। मामला जोधपुर के लोहावट का है। यहां पाबलों की ढाणी के अंग्रेजी माध्यम स्कूल के बैक-टू-बैक दो वीडियो अचानक सोशल मीडिया पर आए। एक वीडियो में मास्टरजी एक बच्ची की चोटी पकड़कर खींचते और चपत लगाते दिखे। वे कह रहे थे कि जो याद करने के लिए दिया था वो याद किया या नहीं? दूसरे वीडियो में वही मास्टरजी पोषाहार का कक्ष खोलते दिखते हैं। एक युवक चावल या गेहूं का कट्‌टा कमरे से उठाकर ले जाता है। स्कूल परिसर में पहले से मौजूद बाइक सवार साथी के साथ कट्‌टा ले जाने की तैयारी होती है। इस दौरान पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना रहा व्यक्ति उठकर युवकों के पास जाता है और पूछता है- कहां ले जा रहे हो? युवक सकपकाते हैं। व्यक्ति फिर पूछता है- किसने ले जाने को कहा? युवक दबे स्वर में कहते है- मास्टरजी ने। मास्टरजी एक बार वहां आते हैं और फिर पीठ दिखाकर दूसरी दिशा में चले जाते हैं। दोनों वीडियो से सोशल मीडिया में हड़कंप मच गया। स्कूल,टीचर, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। आनन-फानन शिक्षा विभाग ने टीम बनाई। स्कूल में भेजी। जांच पड़ताल शुरू हो गई। लोग स्कूल पहुंचकर पड़ताल करने लगे। बच्चों ने जी-भरकर शिकायतें कीं। इस बीच मास्टरजी की सफाई भी आ गई। बोले- मैं अनुशासित और समय का पाबंद हूं। वीडियो 2 महीने पहले का है। छात्रा को डांटा था। दुर्भावनावश मेरे ही स्कूल के स्टाफ ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। छात्र-छात्राओं को डाटना हर टीचर का काम होता है। माता-पिता और टीचर नहीं डांटेगा तो बच्चे पढ़ेंगे कैसे? किसी को शिकायत ही करनी है तो हम क्या कर सकते हैं? 4. चलते-चलते.. राजस्थान को हम राजस्थानवासी किसी भी नजर से देखें। लेकिन दुनिया के लिए राजस्थान धरती पर एक नायाब उपहार की तरह है। यहां थार के रेगिस्तान में बाड़मेर-जैसलमेर जैसे सूखे-खणक शहर भी हैं तो इन्हीं शहरों में सोने जैसे चमकते दुर्ग भी हैं। एक तरफ झीलों की नगरी है तो दूसरी तरफ गुलाबी नगरी है। टाइगर की दहाड़ से गूंजते जंगल हैं तो अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे खूबसूरत गांव भी। इसी विविधता को और अधिक खूबसूरत बना देता है हमारा गीत-संगीत और खान-पान। यहां आकर कोई भी राजस्थान का मुरीद हो सकता है। फिल्मी सितारे तो प्रमोशन के काम से आते ही रहते हैं। यहां के मेजबानी और राजसी ठाठ उन्हें इतना लुभाते हैं कि शाही शादी के लिए उन्हें राजस्थान से बेहतर ठिकाना कोई लगता ही नहीं। हाल ही फिल्म उड़ता तीर के प्रमोशन के लिए एक्टर आयुष्मान खुराना और एक्ट्रेस सारा अली खान जयपुर पहुंचे। यहां वे राजस्थानी गीत-संगीत के रंग में ऐसा रंगे कि कालबेलिया नृत्यांगनाओं को देख खुद को रोक नहीं सके और देसी अंदाज में खूब थिरके। इनपुट सहयोग- अनुराग हर्ष (बीकानेर), अनुराग त्रिवेदी (जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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