जयपुर में दिव्यांग सर्टिफिकेट से ग्राम विकास अधिकारी (वीडिओ) बनने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मेडिकल के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार पर बोर्ड के सामने हमशक्त दिव्यांग भाई को पेश किया गया और सरकारी नौकरी हासिल कर लगी। मामले में SMS हॉस्पिटल थाना पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसएमएस थाने के SI सुरजमल ने बताया कि सीकर एससी/एसटी सेल के हेड कॉन्स्टेबल गणपत सिंह की ओर से मामला दर्ज करवाया गया है। एसओजी को मिली थी शिकायत दरअसल, एसओजी को फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी हासिल करने की शिकायतें मिल रही थी, इसे लेकर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में जांच की गई, जिसमें सामने आया कि झुंझुनूं के खेतड़ी निवासी शेर सिंह ने दिव्यांगजन कोर्ट से ग्राम विकास अधिकारी (वीडिओ) की नौकरी हासिल की है। शेरसिंह का हाल ही मोकलवास तबादला हुआ था और उसने दो दिन पहले ही जॉइन किया था, इसलिए वहां ज्यादातर कर्मचारी उसे पहचानते नहीं थे। इससे पहले सीकर में शेरसिंह की बायोमेट्रिक जांच हो चुकी थी, जिसमें वह खुद पहुंचा था। दोनों दिव्यांग भाई हमशक्त, कदकाठी भी एक जैसा 3 अगस्त को मेडिकल जांच के लिए उसकी जगह भाई हवा सिंह पहुंच गया। दोनों की शक्ल और कदकाठी मिलती-जुलती है। दोनों के दाहिने पैर में दिव्यांगता है, सिर पर बाल भी कम हैं और दोनों एक ही रंग की टोपी लगाते हैं। हवा सिंह मेडिकल के लिए वही कपड़े पहनकर आया, जो शेरसिंह ने बायोमेट्रिक जांच के दिन पहने थे। संयोग से मेडिकल बोर्ड वाले दिन ज्वाइनिंग कराने वाले रामानुज ने भी उसे देखकर संदेह जताया। इसके बाद उप अधीक्षक नरेश कुमार और पुलिसकर्मी गणपत सिंह ने कामकाज के संबंध में सवाल किए तो सामने आया कि मेडिकल कराने शेरसिंह नहीं, उसका भाई हवा सिंह आया है। पूछताछ के बाद सवाई मानसिंह अस्पताल पुलिस थाने में मेडिकल की जांच में फर्जी अभ्यर्थी के पहुंचने का मामला दर्ज कराया है।
चेहरा-कदकाठी व टोपी-कपड़े सबकुछ एक जैसा; तिल के रंग से पकड़ा गया शेरसिंह बनकर आया हवासिंह
