October 20, 2026

अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर रविवार शाम 7 बजे मुंबई में जानलेवा फायरिंग हुई। टाइगर की कार पर फायरिंग करने वाले हमलावर 15 घंटे में राजस्थान में कोटा रेलवे स्टेशन से सुबह करीब 10.30 बजे पकड़े गए। पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंची ही थी। कोटा सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम की टीम ने मुंबई क्राइम ब्रांच के DCP राज तिलक रोशन के एक कॉल पर आरोपियों के कोच को घेर लिया। जनरल कोच में बैठे फायरिंग करने के 2 आरोपियों और एक अन्य आरोपी को 15 मिनट के अंदर डिटेन कर लिया। एक्टर टाइगर पर हमले के बाद कैसे पकड़ में आए शूटर? बैचमेट IPS नेटवर्क का ये को-ऑर्डिनेशन कैसे काम आया? क्यों शूटर्स ने भागने के लिए राजस्थान चुना? यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: मुंबई DCP क्राइम और कोटा SP का बैचमेट कनेक्शन कैसे काम आया? जवाब: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में शूटर्स की गिरफ्तारी के मामले में सबसे बड़ी कामयाबी इंटर-स्टेट पुलिस को-ऑर्डिनेशन बना। मुंबई क्राइम ब्रांच के DCP राज तिलक रोशन IPS 2013 बैच के अफसर हैं। कोटा सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम भी IPS 2013 बैच की अफसर हैं। दोनों एक ही बैच के होने से इस केस में सीधा चैनल खुला। रविवार शाम 7 बजे के करीब जुहू के पुष्पा नारसी पार्क, विले पार्ले के पास टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग हुई थी। मुंबई पुलिस ने केस दर्ज कर 20 से ज्यादा टीमों को आरोपियों को पकड़ने के लिए लगाया। टेक्निकल सर्विलांस से लोकेशन मिली कि शूटर ट्रेन के जरिए रवाना हुए हैं तो DCP रोशन ने सीधे बैचमेट कोटा SP गौतम को अलर्ट किया। SP गौतम ने बताया – मुंबई पुलिस से सुबह सूचना मिलते ही DST, साइबर सेल और आरपीएफ टीम की मदद से महज 15 मिनट में जाल बिछाया। कोटा SP के मुताबिक, मुंबई से इनपुट आते ही AGTF और कोटा सिटी पुलिस और आरपीएफ की जॉइंट टीम ने कार्रवाई की। सवाल-2: मुंबई में 20 टीमें क्या कर रही थीं और कोटा में 15 मिनट में डिटेन कैसे हुए? जवाब: मुंबई पुलिस ने इस केस में दो लेवल पर काम किया। लेवल-1 मुंबई में: क्राइम ब्रांच की 20 टीमों ने जुहू और अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन एरिया के 200 से ज्यादा CCTV, बाइक का रूट और शूटर्स के पहले दिन के फुटेज खंगाले। हमले में इस्तेमाल बाइक को बरामद किया गया। शूटर की पहचान- एक बाइक टैक्सी राइडर के तौर पर हुई जो अंधेरी वेस्ट में रहता था। लेवल-2 कोटा में: इनपुट था आरोपी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में हैं। ये ट्रेन पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस भी कहलाती है। इनपुट के आधार पर DST (District Special Team) ने ट्रेन का कोच और बोगी कन्फर्म की। साइबर सेल ने लाइव लोकेशन और कोच की पॉजिशन ट्रैक की। इसके बाद राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और कोटा सिटी पुलिस ने संयुक्त रूप से घेराबंदी की। फिर RPF ने चारों तरफ से घेर लिया। कोटा में पुलिस टीम करीब 10:17 बजे जनरल कोच में चढ़ी और 15 मिनट में तीनों को उतार लिया। कोटा SP तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, आरोपी जनरल कोच में सफर कर रहे थे। तीनों की पहचान : बिहार का 22 साल का ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन मुंबई में रैपिडो चलाता है। 18 साल का रेहान सोनीपत हरियाणा का रहने वाला है। एक आरोपी फूल सिंह हरियाणा सोनीपत का रहने वाला है। सवाल-3: आरोपियों का आगे का प्लान क्या था? जवाब: कोटा SP तेजस्विनी गौतम ने बताया – प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी जयपुर से दिल्ली और वहां से नेपाल भागने वाले थे। रूट मैप ऐसा था: मुंबई (जुहू) में फायरिंग की। बाद में तीनों आरोपी बाइक से भागे। जहां से वे एसवी रोड से विले पार्ले होते हुए अंधेरी स्टेशन पहुंचे। यहां से ट्रेन में सवार होकर फरार हो गए। इस दौरान पुलिस से बचने के लिए आरोपी गुजरात के सूरत में ट्रेन से उतर गए। फिर यहां से पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल कोच में सवार हो गए। सोमवार सुबह कोटा में पुलिस टीम के हत्थे चढ़ गए। आरोपी इस ट्रेन के जरिए जयपुर पहुंचना चाहते थे और फिर उसके बाद दिल्ली जाते। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने नेपाल भागने की प्लानिंग कर रखी थी। अब इस पूरे मामले में मुंबई पुलिस आरोपियों से आगे की पूछताछ करेगी और इस पूरे नेटवर्क को खंगालने का प्रयास करेगी। सवाल-4: कितने रुपए में हुई टाइगर पर फायरिंग की डील? जवाब: शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी रेहान अपने एक साथी समीर के जरिए गैंगस्टर अनिल पंडित के संपर्क में आया था। करीब डेढ़ महीने पहले समीर ने रेहान की अनिल पंडित से बात करवाई थी। दावा किया जा रहा है कि अनिल पंडित ने समीर के जरिए रेहान को 35 हजार रुपए देने और विदेश भेजने का ऑफर दिया था। यह पैसा काम पूरा होने के बाद मिलना था। …. ये खबरें भी पढ़िए… 1. टाइगर पर हमला,मास्टरमाइंड ने खुद को बताया लॉरेंस का भाई:बेटे के कारण माता-पिता को पुलिस ने पकड़ा था, गांव भी छोड़ा; जानें- कौन है अनिल पंडित 2. कोटा में टाइगर पर फायरिंग करने वालों को कैसे पहचाना:एक घंटे में बना था उन्हें पकड़ने का प्लान; एक पुलिसवाला उनके पास बैठा, और फिर?

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