जयपुर में 8 अगस्त को हुए स्कूल बस हादसे में घायल छात्रा लक्षिता कुमावत की मौत हो गई। मौत के बाद ग्रामीण भड़क गए। ग्रामीणों ने निजी स्कूलों की 4 बसों को रोककर जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी की। इस दौरान जब बसों की जांच की गई, तो स्कूल संचालकों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बसों में क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह भरा गया था। बसों पर अनिवार्य नियम ‘बाल वाहिनी’ तक नहीं लिखा था और सामान्य कमर्शियल वाहनों की तरह बच्चों की जान जोखिम में डालकर परिवहन किया जा रहा था। मामला जयपुर के जोबनेर का है। दरअसल, 8 अगस्त को एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सामने से आ रही स्कूल बस से टकरा गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस पलट गई और उसमें सवार 18 बच्चे घायल हो गए थे। इनमें से 2 बच्चों के सिर में गंभीर चोट आई थी, जबकि 3 बच्चों के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। इसी हादसे में गंभीर रूप से घायल लक्षिता का अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। अब देखिए, ग्रामीणों के हंगामें जुड़ी PHOTOS…
ग्रामीणों का आरोप- बस लॉक कर बच्चों को अंदर ही बैठाए रखा विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आईपीएस स्कूल की एक बस के चालक ने बस रोके जाने के बाद बच्चों से भरी बस को अंदर से लॉक कर दिया और किसी भी ग्रामीण को अंदर नहीं चढ़ने दिया। वहीं, दूसरी बस के ड्राइवर ने ग्रामीणों से बहस करते हुए कहा- हम आपके पास बच्चे लेने नहीं आते, आप खुद बच्चों को हमारे पास भेजते हैं। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों पर डाली जिम्मेदारी उधर, स्कूल प्रबंधन ने इस पूरी लापरवाही की जिम्मेदारी अभिभावकों पर ही डाल दी है। आईपीएस स्कूल प्रबंधन से जुड़े भगवान सहाय चौधरी ने तर्क दिया कि बसें अभिभावकों की सहमति से ही संचालित होती हैं। एक बच्चे को स्कूल लाने-ले जाने में करीब 3 हजार रुपये प्रतिमाह का खर्च आता है, जबकि कई अभिभावक 500 रुपये देने में भी आनाकानी करते हैं। यदि अभिभावक सीट के हिसाब से पूरा खर्च देने को तैयार हों, तो अतिरिक्त बसें भी लगाई जा सकती हैं। गरीब बच्चों के लिए अलग बस चलाने का तर्क वहीं, स्कूल के सचिव शैलेश बूरी ने कहा कि गरीब बच्चों के लिए अलग बस चलाने की व्यवस्था की जाएगी। उनके अनुसार, कुछ अभिभावकों और बच्चों ने गरीब बच्चों के साथ एक ही बस में यात्रा करने पर आपत्ति जताई थी, जिसके कारण बसों में बच्चों की संख्या को लेकर यह स्थिति बनी। मामला बढ़ने पर मौके पर पहुंचे जोबनेर थाने के एएसआई मदनलाल ने सभी संबंधित स्कूल बसों के चालान करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। हाथ-पैर में फ्रैक्चर हुआ था आसलपुर मार्ग पर हुए स्कूल बस हादसे में गंभीर रूप से घायल छात्रा लक्षिता कुमावत (15) ने रविवार सुबह जयपुर के एसएमएस (SMS) ट्रॉमा सेंटर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में लक्षिता के हाथ-पैर में फ्रैक्चर हो गया था और कमर में गंभीर चोट लगने के कारण लगातार रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हो रहा था। डॉक्टर उसके ऑपरेशन की तैयारी कर ही रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। ह तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी लक्षिता आसलपुर निवासी लक्षिता अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी और बेहद होनहार थी। उसने जोबनेर के स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से दसवीं बोर्ड की पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के साथ-साथ वह स्कूल की विभिन्न खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हमेशा आगे रहती थी और कई पुरस्कार व मेडल जीत चुकी थी। इसी मार्ग पर हुई थी दादा की मौत करीब 2 वर्ष पहले इसी आसलपुर सड़क मार्ग पर हुए एक अन्य सड़क हादसे में लक्षिता के दादा की भी मौत हुई थी। अब उसी खूनी सड़क ने परिवार की लाडली को भी हमेशा के लिए छीन लिया, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। — यह खबर भी पढ़िए… स्कूल बस से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, 18 बच्चे घायल:बस के अंदर फंसे बच्चों को लोगों ने निकाला; 8 स्टूडेंट गंभीर हालत में जयपुर रेफर जयपुर जिले में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सामने से आ रही स्कूल बस से टकरा गई। बस पलटते ही बच्चों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में 18 स्टूडेंट घायल हो गए। 2 बच्चों के सिर में चोट आई है, जबकि 3 बच्चों के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। एक बच्चे के हाथ में चोट आई है। पढ़ें पूरी खबर
